वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की पृष्ठभूमि में व्हाइट हाउस ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ईरान परमाणु हथियार हासिल ना कर सके. इधर, ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने टि्वटर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों पर पलटवार करते हुए उन्हें ‘‘सावधान रहने’’ की चेतावनी दी है. Also Read - मीडिया पर भड़के Donald Trump, कहा-सबसे ज्यादा खूबसूरत है मेरी पत्नी मेलानिया, क्यों किया भेदभाव

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स से ईरान को धमकी देने वाले ट्रंप के ट्वीट के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘मुझे लगता है कि राष्ट्रपति पहले ही दिन से ईरान के प्रति सख्त लहजे का इस्तेमाल कर रहे हैं. वह उनके द्वारा की गई टिप्पणियों का जवाब दे रहे थे और वह अमेरिकी लोगों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.’’ Also Read - US Presidential Election Results: गुस्से में ट्रंप ने लगाया बड़ा आरोप, ये चोरी का चुनाव, मेरे पास हैं सुबूत

उन्होंने कहा, ‘‘मैं बारीकियों में नहीं जा रही हूं और निश्चित तौर पर प्रेस के साथ कोई बातचीत नहीं करने जा रही. यह एक फैसला होगा जो राष्ट्रपति करेंगे लेकिन उनका एकमात्र लक्ष्य और ध्यान यह सुनिश्चित करना है कि हम उनके हाथों में परमाणु हथियार ना पहुंचने दें और अमेरिका की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करें.’’ Also Read - डोनाल्ड ट्रंप का अजीबोगरीब बयान ''चीन की वजह से मुझे कोरोना हुआ, अब चीन भुगतेगा''

वहीं, ट्रंप की टि्वटर पर ईरान के नेताओं को दी धमकी की नकल करते हुए जरीफ ने लिखा, ‘‘अप्रभावित … हम सदियों से यहां हैं. हम यहां सदियों से हैं हमने अपने साम्राज्य सहित कई साम्राज्यों को बनते-बिगड़ते हुए देखा है. हमारे उस साम्राज्य का जीवन काल भी इतना लंबा रहा, जितनी कुछ देशों की उम्र भी नहीं है. सावधान रहो.’’

जरीफ ट्रंप के रविवार को किए गए उस ट्वीट का जवाब दे रहे थे जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी थी, ‘‘दोबारा अमेरिका को मत धमकाना अन्यथा आपको ऐसे अंजाम भुगतने पड़ेंगे जिसके उदाहरण इतिहास में बिरले ही मिलते हैं.’’ ट्रंप की इस टिप्पणी से पहले रुहानी ने अमेरिकी नेता को चेतावनी दी थी कि वह ‘‘सोते हुए शेर को ना छेड़ें.’’ रुहानी ने कहा कि ईरान के साथ लड़ाई ‘‘सभी युद्धों की मां’’ (सबसे भीषण लड़ाई) साबित होगी. जरीफ ने कहा, ‘‘दुनिया ने कुछ महीने पहले इससे बड़ी धमकी सुनी थी और ईरानियों ने भी वह सुनी थी जबकि वह 40 वर्षों से सबसे सभ्य देशों में से एक है.’’