'न एयरफोर्स बची, न नेवी, ईरान अब पूरी तरह खत्म...', तेहरान पर फिर भड़के ट्रंप, बोले- मदद तो दूर 10 सेंट भी नहीं देंगे

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:June 19, 2026 11:51 PM IST

Donald Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हालिया युद्ध के बाद ईरान की सैन्य ताकत बुरी तरह कमजोर हो गई है. उन्होंने कहा कि अमेरिका तेहरान को कोई आर्थिक राहत नहीं देगा, जबकि दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है.

  • ट्रंप ने दावा किया कि हालिया युद्ध के बाद ईरान की सैन्य ताकत और रक्षा क्षमता बुरी तरह कमजोर हुई है.
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान खुद समझौते के लिए आगे आया, अमेरिका किसी दबाव में नहीं था.
  • ट्रंप ने ईरान को आर्थिक राहत देने की संभावना से साफ इनकार करते हुए सख्त रुख दिखाया.
  • ईरान ने पलटवार करते हुए कहा कि समझौते को सफल बनाने के लिए अमेरिका ज्यादा उत्सुक था.

Donald Trump Attack on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय एक बार फिर बयानबाजी के जरिए बढ़ता नजर आ रहा है. हाल ही में हुए संघर्ष और उसके बाद सामने आए समझौते के मसौदे के बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा बयान दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है.

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डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि हालिया युद्ध ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है. उनके अनुसार, तेहरान अब पहले जैसी ताकत नहीं रखता और उसकी कई प्रमुख रक्षा व्यवस्थाएं कमजोर हो चुकी हैं. ट्रंप का कहना है कि युद्ध का असर ईरान की वायु और समुद्री शक्ति पर साफ दिखाई दे रहा है. उन्होंने ये भी संकेत दिया कि अमेरिका ईरान को किसी तरह की आर्थिक राहत देने के पक्ष में नहीं है.

ईरान आया था समझौते के लिए आगे

अपने बयान में ट्रंप ने ये भी कहा कि अमेरिका ने किसी दबाव में आकर बातचीत नहीं की, बल्कि ईरान ही समझौते के लिए आगे आया था. उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में तेहरान की स्थिति काफी कमजोर है और वह पहले जैसी रणनीतिक स्थिति में नहीं है. ट्रंप की ये टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्कों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने घरेलू राजनीतिक विरोधियों पर भी निशाना साधा. उन्होंने उन दावों को खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान युद्ध के बाद और अधिक मजबूत होकर उभरा है. ट्रंप का कहना है कि हालात इसके बिल्कुल उलट हैं और संघर्ष का सबसे बड़ा नुकसान ईरान को हुआ है.

दूसरी ओर, ईरान की तरफ से भी जवाबी बयान सामने आए हैं। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका समझौते को लेकर ज्यादा उत्सुक था और उसने वार्ता को सफल बनाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए. ईरान के वरिष्ठ नेताओं ने ये भी कहा कि किसी भी समझौते को स्वीकार करने से पहले राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय रणनीतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा गया.

दोनों के बीच जारी जुबानी जंग

विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच जारी ये जुबानी जंग केवल राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि इसके पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के संदेश छिपे हुए हैं. अमेरिका में ट्रंप अपनी विदेश नीति को मजबूत दिखाना चाहते हैं, जबकि ईरान अपने नागरिकों और सहयोगी देशों को ये भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है कि वह दबाव में नहीं झुका है.

पश्चिम एशिया की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए ये बयानबाजी आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है. ऊर्जा बाजार, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीति पर अमेरिका-ईरान संबंधों का सीधा प्रभाव पड़ता है. यही वजह है कि दुनिया भर की नजरें दोनों देशों के अगले कदमों पर टिकी हुई हैं.

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