Iran-US War: क्या ईरान के खौफ में आ गया UAE? 3 अरब डॉलर, 2 टन सोना और 15 एयरक्राफ्ट कर रहा ट्रांसफर
ईरान और UAE के बीच किसी तरह की आर्थिक या कूटनीतिक समझ बनती है, तो उसका असर केवल दोनों देशों पर नहीं बल्कि तेल बाजार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, वैश्विक शिपिंग और पूरी खाड़ी की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है.
जंग के दौरान ईरान ने UAE में अमेरिका के कई ठिकानों को निशाना बनाया था. (PTI)
- ईरान की 100 अरब डॉलर से ज्यादा की फॉरिन एसेट है अलग-अलग देशों में फ्रीज
- दक्षिण कोरिया में ईरान का फंसा है 6 अरब डॉलर, अब तक नहीं मिला पेमेंट
- कच्चे तेल के निर्यात से होने वाली कमाई तक ईरान के पास नहीं पहुंच रही पूरी
- जंग खत्म करने के लिए ईरान ने 24 अरब डॉलर का फ्रीज्ड फंड रिलीज करने की रखी शर्त
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान की जंग के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है. CNN-News18 की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि संभावित हमलों से बचने के लिए UAE ने ईरान को मनाने की कोशिशें तेज कर दी हैं. UAE अपने बैंक में फ्रीज असेट को ईरान को वापस करने जा रहा है. इसके तहत ईरान को करीब 3 अरब डॉलर की संपत्ति, लगभग 2 टन सोना और 15 एयरक्राफ्ट ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है. UAE के इन कदमों को ईरान के साथ तनाव कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, अभी तक इन रिपोर्टों पर ईरान या UAE की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
2018 में अमेरिका ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से खुद को अलग कर लिया. इसके बाद ईरान पर फिर से कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए गए. तब से ईरान इन पाबंदियों का सामना कर रहा है. इससे पहले भी UAE की ओर से ईरानी संपत्तियों को लेकर सामने आई कुछ रिपोर्टों का आधिकारिक तौर पर खंडन किया जा चुका है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने जून में सूत्रों के हवाले से बताया था कि UAE ने ईरान के लिए अरबों डॉलर जारी करने पर सहमति जताई थी. UAE ने बाद में कहा था कि उसके यहां मौजूद किसी फ्रीज्ड ईरानी फंड को रिलीज या ट्रांसफर नहीं किया गया.
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क्या डरा हुआ है UAE?
दरअसल, 28 फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ जंग छेड़ने के बाद पूरा खाड़ी क्षेत्र संघर्ष की चपेट में आ गया है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में खाड़ी के कई देशों को निशाना बनाया. UAE भी इसमें शामिल रहा. UAE के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जंग शुरू होने के बाद से ईरान की ओर से बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे गए हैं. इनमें से ज्यादातर को एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया. इसके बावजूद मलबा और कुछ हमले आबादी वाले इलाकों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंचे.
दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील है. UAE की अर्थव्यवस्था पर्यटन, एविएशन, ट्रेड, फाइनेंस और तेल कारोबार पर काफी निर्भर है. ऐसे में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है.
3 अरब डॉलर वाली डील क्या है?
CNN-News18 की रिपोर्ट में जिस 3 अरब डॉलर की रकम का जिक्र है, उसका संबंध ईरानी फंड और संपत्तियों से बताया जा रहा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी पिछली रिपोर्ट में इसका जिक्र किया था. 3 अरब डॉलर से ज्यादा की रकम पहले ही उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई थी. कुछ अन्य सूत्रों ने पूरी व्यवस्था की कीमत 20 अरब डॉलर तक बताई थी.
2 टन सोना और 15 एयरक्राफ्ट भी ईरान को मिलेंगे वापस
रिपोर्ट में UAE की तरफ से ईरान को 2 टन सोना और 15 एयरक्राफ्ट भी ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है. अगर ये दावे सही साबित होते हैं तो यह केवल आर्थिक लेनदेन नहीं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक दबाव का संकेत माना जाएगा. सोने का ट्रांसफर खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि युद्ध और प्रतिबंधों के दौर में सोना किसी देश के लिए बेहद अहम रणनीतिक संपत्ति होता है. वहीं, एयरक्राफ्ट को एक देश से दूसरे देश ले जाना एविएशन और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से बड़ा कदम है.
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अबू धाबी से ईरान को भेजी गई संपत्तियां
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की ये संपत्तियां एयरक्राफ्ट के जरिए भेजी जा रही हैं. 11 और 12 अगस्त को अबू धाबी से तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट और कराज के पयाम एयरपोर्ट के बीच कई बार आवाजाही हुई. हर बार एयरक्राफ्ट लगभग एक घंटे रुकने के बाद वापस लौट आया. संयुक्त अरब अमीरात स्थित ECT एविएशन सपोर्ट की ओर से सऊदी अरब एयरलाइंस के पूर्व बोइंग 777-268ER एयरक्राफ्ट के जरिए ये संपत्तियां ईरान को ट्रांसफर हुई हैं. इसके अलावा 3 बोइंग 737-300/500 एयरक्राफ्ट और दो पूर्व कॉन्डोर एयरबस A320-212 एयरक्राफ्ट ईरानी एयरलाइंस को बेचे गए हैं. इससे पहले 8 जून को अबू धाबी से तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पर ये एयरक्राफ्ट देखे गए थे.
ईरान के फ्रीज्ड फंड की डिटेल
- इसकी शुरुआत 1979 से होती है. ईरानी क्रांति के बाद अमेरिका ने अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियां फ्रीज की. 1980 में बंधक संकट के दौरान हुए समझौते के तहत ईरान को कुछ रकम रिलीज किया गया. फिर 1995 में ईरान ने तेल और ऊर्जा क्षेत्र पर बड़े प्रतिबंध लगा दिए.
- 2012 में ईरान पर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर कई प्रतिबंध लगाए गए. इसके बाद विदेश के बैंकों में ईरान की तेल से हुई कमाई फंसने लगी.
- 2015 मे ईरान के साथ अमेरिका का न्यूक्लियर समझौता हुआ. इसके बाद कुछ फंड वापस किया गया. प्रतिबंधों में भी थोड़ी-बहुत राहत मिली. 2018 में ट्रंप ने अमेरिका को ईरान के साथ हुए इस डील से बाहर निकाल दिया. 2026 में जंग खत्म करने के लिए 24 अरब डॉलर का फ्रीज्ड फंड रिलीज करना ईरान की सबसे बड़ी शर्त है.
कितनी रकम विदेशों में फंसी है?
अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और सरकारी बयानों के मुताबिक, ईरान की 100 अरब डॉलर से ज्यादा के फॉरिन एसेट किसी न किसी रूप में फंसी हुई है. हालांकि, इनमें से पूरी राशि कैश में नहीं है. कुछ रकम निवेश, फॉरिन इंवेस्टमेंट और अन्य वित्तीय संपत्तियों के रूप में भी है.
किन देशों में फंसा है ईरान का पैसा?
दक्षिण कोरिया में लगभग 6 अरब डॉलर कई वर्षों तक ईरानी तेल के भुगतान के रूप में फंसे रहे. बाद में अमेरिका की मंजूरी के बाद इस राशि को कतर के बैंकों में शिफ्ट किया गया. इसके इस्तेमाल पर भी शर्तें लगीं. ईरान यही पैसा लेने दोहा जा रहा है. इराक में भी ईरान के फंड फंसे हुए हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के 10–11 अरब डॉलर तक के पेमेंट लंबे समय तक प्रतिबंधों के कारण अटके रहे. इसके साथ ही जापान और अन्य एशियाई देशों में भी ईरान की तेल से हुई कमाई अटकी हुई है.
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