कीव: यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने शनिवार को बताया कि कीव में ऑर्थोडॉक्स बिशपों की एक ऐतिहासिक परिषद ने रूस से स्वतंत्र नए यूक्रेन चर्च की स्थापना की है. यूक्रेन के पादरियों ने देश के 11वीं शताब्दी के संत सोफिया कैथेड्रल में एक ऐतिहासिक धर्मसभा आयोजित की. इस समारोह का मकसद रूस से स्वतंत्र ऑर्थोडॉक्स चर्च की स्थापना के लिए काम की शुरूआत करना है. पोरोशेंको ने मध्य कीव में परिषद के निर्णय का इंतजार कर रही भीड़ को बताया, ‘‘यह हो गया है.’’ उन्होंने यह भी बताया कि परिषद ने नए चर्च के प्रमुख के रूप में 39 वर्षीय मेट्रोपॉलिटन येपिफानिय को चुना है. उनको सर्गिय डुमेन्को के नाम से भी जाना जाता है.

दरवाजे सभी के लिए खुले हैं
येपिफानिय ने कैथेड्रल के बाहर इंतजार कर रही जनता को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘मैं नवनिर्मित यूनाइटेड यूक्रेनियन ऑर्थोडॉक्स चर्च में विश्वास करने वाले अपने सभी भाइयों, बिशपों और श्रद्धालुओं को कहना चाहता हूं कि हमारे चर्च के दरवाजे सभी के लिए खुले हुए हैं.’’ इससे पहले उन्होंने बिशपों की धर्मसभा में कहा था कि कीव की राष्ट्रीय सुरक्षा मॉस्को से ‘आध्यात्मिक स्वतंत्रता’ में निहित है. हालांकि, इस दौरान उन्होंने कहा कि जो कोई भी रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च से जुड़ा रहना चाहता है वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है. उक्रेन की मकदूनिया एंबेसी ने भी इस ऐतिहासिक अवसर पर ट्वीट किया ‘आज बहुत बड़ा दिन ….रसियन ऑर्बिट से बाहर की ओर एक और कदम.

रूस ने खत्म किए संबंध
गौरतलब है कि 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे के बाद यूक्रेन और रूस के संबंध बिगड़ गए थे. इस वर्ष यह तनाव धार्मिक क्षेत्र में भी फैल गया. धर्मसभा ने इस्तांबुल के इक्यूमेनिकल पैट्रियार्क बार्थोलोमियू-1 द्वारा रूस के ऑर्थोडॉक्स चर्च से यूक्रेन की स्वतंत्रता को मान्यता देने संबंधी एक फैसले पर ध्यान देने के संबंध में सोचा. अक्टूबर में आए इस फैसले ने हालांकि रूस की त्योरियां चढ़ा दीं. यह ऑर्थोडॉक्स की यूक्रेन शाखा की पिछले 332 वर्ष से निगरानी कर रहा था. नाराज रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च ने कांस्टैनटाइनोपल इक्यूमेनिकल पैट्रियार्क से अपने सारे संबंध समाप्त कर लिए. धर्मसभा का मकसद यूक्रेन भर के ऑर्थोडॉक्स चर्च की विभिन्न शाखाओं को एक स्वतंत्र निकाय के अंतर्गत लाना था, लेकिन यूक्रेन में मॉस्को के प्रति झुकाव वाले चर्च ने कहा था कि वह इस समारोह का बहिष्कार करेगा. साथ ही उसने अपने पादरियों के वहां जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था. (इनपुट एजेंसी)

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