नई दिल्लीः भारत और चीन (India China border issue) के बीच इन दिनों सीमा को लेकर विवाद जारी है. इस बीच नेपाल और भारत के बीच भी एक बार फिर विवादास्पद मानचित्र को लेकर गहमागहमी एक बार बढ़ती दिख रही है. नेपाल, बार-बार कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्रों पर अपना कब्जा जता रहा है. ऐसे में नेपाल अपना विवादित नक्शा संयुक्त राष्ट्र और गूगल को भेजने की तैयारी कर रहा है. Also Read - नीतीश कुमार ने PM मोदी से की नेपाल की शिकायत, कहा- बाढ़ रोकने में सहयोग नहीं कर रहा ये देश

केपी शर्मा ओली की अगुवाई में नेपाल सरकार ने अपने मानचित्र को अपडेट करने के लिए यूएन और गूगल को इसका नक्शा भेजने की योजना बनाई है, लेकिन खबर है कि यूनाइटेड स्टेट्स से नेपाल को इस मामले पर बड़ा झटका लगा है. Also Read - UN और भारत सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों को नया MAP भेजने की तैयारी में नेपाल, भारतीय भू-भाग पर किया दावा

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) ने नेपाल के विवादित नक्शे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. यूनाइटेड स्टेट्स के मुताबिक, आधिकारिक कामकाज के लिए संस्था ना तो नेपाल के नए विवादित नक्शे को स्वीकार करेगी और ना ही इसे मान्यता देगी. बता दें, नेपाल ने हाल ही में संसद में विवादास्पद नए मानचित्र को पारित किया है, जिसमें नेपाल सरकार ने भारत के हिस्से वाले लिंपियाधुरा, काला पानी और लिपुलेख को नेपाल का हिस्सा बताया है. Also Read - पीएम मोदी की अयोध्या यात्रा और स्वतंत्रता दिवस के चलते नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में हाई अलर्ट

हालांकि, इन तीनों ही क्षेत्रों पर भारत का दावा है. नेपाल सरकार के इस नक्शे को भारत पहले ही अस्वीकार कर दिया है. इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने भी नेपाल के नए नक्शे को मान्यता देने से इनकार कर दिया है. संयुक्त राष्ट्र (UN) ने ये भी कहा है कि जब भी नेपाल इस तरह के किसी भी मामले को सदन में रखेगा तो सिर्फ कूटनीतिक प्रोटोकाल ही स्वीकार किए जाएंगे.