क्या अमेरिका-ईरान ने चुपके से डिजिटल डील की है साइन ? ईरान को मिलेगी भारी रकम! 24 बिलियन डॉलर अनलॉक?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक डिजिटल MoU ने मध्य पूर्व की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। होर्मुज स्ट्रेट खोलने और सीजफायर बढ़ाने पर सहमति बनने की चर्चा है. 24 अरब डॉलर की फ्रोजन संपत्तियों को लेकर दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं. समझौते को तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन कई मुद्दों पर अभी भी सहमति बाकी है.
- अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के सीजफायर एक्सटेंशन के लिए डिजिटल MoU साइन किया है.
- समझौते में होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत का रास्ता तय किया गया है.
- ईरानी मीडिया ने 24 अरब डॉलर की फ्रोजन संपत्तियां रिलीज होने का दावा किया है, जबकि अमेरिका ने इससे इनकार किया है.
- यह अंतिम शांति समझौता नहीं, बल्कि तनाव कम करने के लिए बनाया गया अस्थायी फ्रेमवर्क है.
ईरान vs अमेरिका-इजरायल वॉर 28 फरवरी 2026 से लेकर अब, करीब 3.5 महीने बाद मिड जून में किसी नतीजे पर पहुंचने के रास्ते पर है. अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक प्रारंभिक समझौता (Memorandum of Understanding - MoU) इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन हुआ है. इसमें मुख्य रूप से 60 दिनों के ceasefire एक्सटेंशन, होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और ईरान की फ्रोजन संपत्ति (लगभग 24 अरब डॉलर) को चरणबद्ध तरीके से रिलीज करने की बात है, ताकि आगे न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत हो सके. यह कोई पूरा फाइनल डील नहीं है, बल्कि टेंपरेरी फ्रेमवर्क है जो हाल के टेंशन (संभावित युद्ध या संघर्ष) को कम करने की कोशिश है. nypost.com के मुताबिक, अमेरिका ने बड़े पैमाने पर स्पष्ट रूप से (upfront) पेमेंट से इनकार किया है, जबकि ईरानी मीडिया ने 24 बिलियन की राशि पर जोर दिया है.
- ट्रंप प्रशासन शांति और न्यूक्लियर रोकथाम का दावा कर रहा है, लेकिन पैसे और शर्तों पर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं.
- अमेरिका और ईरान के बीच इलेक्ट्रॉनिक तरीके से MoU पर हस्ताक्षर हो गए हैं.
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद-बाघेर गालिबाफ ने डिजिटल रूप से साइन किया. यह एक सरप्राइज था क्योंकि जेनेवा में फॉर्मल साइनिंग समारोह शुक्रवार 12 जून को प्लान था.
al-monitor.com के मुताबिक ईरानी मीडिया (जैसे मेहर न्यूज) के अनुसार, 14-पॉइंट ड्राफ्ट में 60 दिनों की नेगोशिएशन पीरियड के दौरान ईरान की 24 बिलियन डॉलर फ्रोजन एसेट्स रिलीज करने का प्रावधान है. इसमें से आधी रकम नेगोशिएशन शुरू होने से पहले उपलब्ध कराई जाएगी. यह सीजफायर को एक्सटेंड करने और Lebanon में भी युद्ध रोकने से जुड़ा है.
अमेरिकी पक्ष ने 24 बिलियन डॉलर के फिगर से इनकार किया है. वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने कहा कि एग्रीमेंट के टेक्स्ट में ऐसा कुछ नहीं है और full text जल्द रिलीज किया जाएगा. ट्रंप प्रशासन compliance-based phased relief की बात कर रहा है, न कि बड़े पैसे की.
समझौते का मकसद
समझौते का मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत सभी के लिए खोलना है, जो तेल ट्रांस्पोर्ट के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इससे रीजनल ट्रेड और एनर्जी सप्लाई पर असर पड़ेगा. पाकिस्तान के PM शहबाज शरीफ ने भी इलेक्ट्रॉनिक साइनिंग की सुविधा प्रदान करने की बात कही.
- यह MoU अंतिम शांति समझौता नहीं है. यह 60 दिनों का युद्धविराम की अवधि बढ़ाना है, जिसमें nuclear program (uranium enrichment, stockpiles) पर और बातचीत होगी. मिसाइल प्रोग्राम और प्रॉक्सी जैसे मुद्दे अलग रह सकते हैं. ईरान प्रतिबंधों से राहत और तेल निर्यात की छूट चाहता है.
- jagran.com के मुताबिक दोनों पक्षों में अभी भी मतभेद हैं. ईरान कट्टरपंथियों की प्रतिक्रिया और अमेरिका/इजराइल पक्ष सत्यापन और प्रवर्तन पर चिंतित हैं. कुछ रिपोर्ट्स में 300 बिलियन पुनर्निर्माण पैकेज का जिक्र है, लेकिन यह पुष्टि नहीं है.
यह डेवलपमेंट 2025-26 की बातचीत और हालिया टकराव के बाद आया है. यह अस्थायी रूप से तनाव कम करना है जिसमें पैसे का पेंच अभी भी अटका हुआ दिखता है. पूरा टेक्स्ट रिलीज होने के बाद स्थिति साफ होगी.
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