नई दिल्ली: अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ डॉलर यानी 21 हजार करोड़ रुपए की सहायता राशि रोक दी है. अमेरिका का मानना है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने में असफल रहा है. पेंटागन ने अमेरिकी संसद से अनुरोध किया है कि वह कोलिजन सपोर्ट फंड के तहत पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ डॉलर की राशि पर फिर से विचार करे क्योंकि पाकिस्तान दक्षिण एशिया रणनीति के तहत ठोस कार्रवाई करने में असफल रह रहा है.Also Read - ईशनिंदा के नाम पर पाकिस्तान में भीड़ ने श्रीलंकाई नागरिक को पीट-पीट मारा और फिर सरेआम जिंदा जलाया

पेंटागन के प्रवक्ता कोन फकनर ने बताया कि दक्षिण एशिया रणनीति के तहत पाकिस्तान की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण 30 करोड़ डॉलर की राशि पर फिर से विचार किया गया है. रक्षा विभाग ने जून/जुलाई, 2018 में इसपर प्राथमिकता से विचार किया क्योंकि 30 सितंबर, 2018 को इस निधि के प्रयोग की अवधि समाप्त हो जाएगी. इसके साथ ही रक्षा विभाग अभी तक कोलिजन सपोर्ट फंड के रूप में पाकिस्तान को दी जाने वाली 80 करोड़ डॉलर की राशि पर पुन:विचार कर चुका है. Also Read - पाकिस्तान ने भारत को मानवीय मदद अफगानिस्तान पहुंचाने की इजाजत दी, गेहूं और दवा भेजी जाएगी

इस निधि पर पुन:विचार इसलिए किया जा रहा है क्योंकि अमेरिका के रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने यह प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया है कि पाकिस्तान ने हक्कानी नेटवर्क और लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ कड़े कदम उठाए हैं.एक सवाल के जवाब में फकनर ने कहा, यह कोई नया फैसला या नयी घोषणा नहीं है. Also Read - ICC Test Championship Points Table: श्रीलंका ने जमाया शीर्ष पर कब्जा, तीसरे पायदान पर टीम इंडिया

दूसरी ओर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने नवगठित आर्थिक सलाहकार समिति में कई विदेशी अर्थशास्त्रियों को शामिल किया. इसका मकसद देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करना है, ताकि देश के लिए आर्थिक नीतियां बनाते समय पेशेवर आर्थिक सलाह मिल सके. डॉन अखबार में रविवार को छपी खबर के मुताबिक खान की सरकार के सामने 10 अरब डॉलर के अंतर को पाटने की तत्काल चुनौती है. इसकी प्रमुख वजह देश से बड़ी राशि का बाहर जाना और निवेश कम होना है.

पाकिस्तान का मौजूदा समय में चालू खाते का घाटा 18 अरब डॉलर है, वहीं इसका विदेशी मुद्रा भंडार मात्र 10 अरब डॉलर से कुछ अधिक है. यह दो माह के आयात को पूरा करने में ही सक्षम है. पुरानी परंपराओं से अलग इस आर्थिक सलाहकार परिषद में खान ने 18 सदज्ञयों की नियुक्ति की है. इसकी अध्यक्षता वह खुद करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि सबसे अच्छी पेशेवर आर्थिक सलाह का उपयोग किया जाए. डॉन की खबर के मुताबिक परिषद की पहली बैठक जल्द हो सकती है.