वॉशिंगटन। रूस से हथियारों की खरीद पर भारत को दंडात्मक अमेरिकी प्रतिबंधों से स्वत: छूट से इनकार करते हुए पेंटागन ने कहा कि अगले हफ्ते नई दिल्ली के साथ होने वाली पहली ‘टू प्लस टू’ वार्ता से पहले करीब पांच अरब अमेरिकी डॉलर के मिसाइल रक्षा प्रणाली सौदे को लेकर अमेरिका की कुछ चिंताएं हैं. प्रतिबंधों के जरिए अमेरिका के विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई कानून(सीएएटीएसए) से छूट भारत जैसे देशों को अमेरिकी प्रतिबंध से बचाती है. Also Read - पंतजलि ने PM CARES Fund में 25 करोड़ रुपए का सहयोग दिया: योगगुरु रामदेव

एस-400 ट्रिंफ मिसाइल वायु रक्षा प्रणाली खरीद की योजना Also Read - Coronavirus लॉकडाउन में ये काम कर रहे हैं PM मोदी, शेयर किए 3D Videos

भारत, रूस से करीब साढ़े चार अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से पांच एस-400 ट्रिंफ मिसाइल वायु रक्षा प्रणाली खरीदने की योजना बना रहा है. अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस सार्वजनिक रूप से भारत को प्रतिबंधों से छूट देने के समर्थक रहे हैं. भारत-रूस के इस सौदे पर अमेरिका की निगाहें टिकी हुई हैं. पीएम नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बातचीत में इस बड़े रक्षा सौदे को आगे बढ़ाया गया था. Also Read - राहुल गांधी ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, बोले- अचानक बंद होने से भय और भ्रम पैदा हो गया है

एशिया और प्रशांत सुरक्षा मामलों के लिये सहायक रक्षा मंत्री रैंडल जी श्राइवर ने कहा, मैं यहां बैठकर आज आपको नहीं बता सकता कि (सीएएटीएसए) रियायत का अनिवार्य रूप से इस्तेमाल किया जाए. यह ऐसा मुद्दा है कि इस पर हमारी सरकार के सर्वोच्च स्तर पर चर्चा होगी और वे कुछ तय करेंगे.

रूस के साथ भारत के मिसाइल डील में अड़ंगा लगाने अमेरिका कर सकता है ये काम

उन्होंने कहा, हम ऐतिहासिक भारत-रूस रिश्तों को समझते हैं. हम भारत के साथ विरासत पर नहीं भविष्य को लेकर बातचीत चाहते हैं. सीएएटीएसए पर मैटिस ने भारत को अपवाद के लिये अपील की है लेकिन मैं इसकी गारंटी नहीं दे सकता कि भविष्य की खरीद के लिये छूट का इस्तेमाल किया जा सकेगा. श्राइवर ने वॉशिंगटन में कहा, रूस ऐसा देश नहीं है जिससे आप रणनीतिक साझेदारी चाहते हैं.

नई दिल्ली में भारत के साथ आगामी टू प्लस टू के लिये रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस की प्राथमिकताओं पर चर्चा करते हुए श्राइवर ने कहा कि सीएएटीएसए रूसी व्यवहार का नतीजा था, न कि भारतीय.
उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ उसकी रक्षा जरूरतों और विकल्पों पर बात करने का इच्छुक है.