अमेरिका की कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया, ग्लोबल टैरिफ की घोषणा गैरकानूनी घोषित, रद्द करने का फैसला

Trump global tariff: 2-1 के बहुमत वाले फैसले में, अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने कहा कि ट्रंप प्रशासन 1974 के 'व्यापार अधिनियम' की धारा 122 के तहत चालू खाते के घाटे को आधार बनाकर टैरिफ नहीं लगा सकता.

Written by: Shivendra Rai
Published: May 8, 2026, 8:36 AM IST

US federal trade court down Trump’s tariff: अमेरिका की एक संघीय व्यापार अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने ट्रंप के हालिया वैश्विक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने के फैसले को रद्द कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि ट्रंप प्रशासन ने व्यापार कानून के तहत मिली अपनी शक्तियों का उल्लंघन किया है. ये फैसला मेरिका में आने वाले सामानों पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने से जुड़ा था.

अमेरिका अदालत ने क्या कहा?

2-1 के बहुमत वाले फैसले में, अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय ने कहा कि ट्रंप प्रशासन 1974 के ‘व्यापार अधिनियम’ की धारा 122 के तहत चालू खाते के घाटे को आधार बनाकर टैरिफ नहीं लगा सकता. कोर्ट ने कहा कि यह कानून 1970 के दशक में मौजूद अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली से जुड़े विशेष ‘भुगतान-संतुलन’ संकटों से निपटने के लिए बनाया गया था. आधुनिक व्यापार घाटे से निपटने के लिए नहीं. संघीय व्यापार अदालत में टैरिफ से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही पीठ के जज मार्क ए. बार्नेट और क्लेयर आर. केली ने ट्रंप के फैसले को गैरकानूनी माना.

क्या था मामला?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये टैरिफ इस साल फरवरी महीने में लगाए थे. 2026 की शुरुआत में अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन शक्तियों वाले कानून के तहत ट्रंप द्वारा लागू की गई टैरिफ व्यवस्था को रद्द कर दिया था. इसके बाद नए टैरिफ की घोषणा धारा 122 के तहत की गई थी. यह 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत तक का अस्थायी आयात शुल्क लगाने की अनुमति देती है.

मामले की सुनवाई करते हुए अमेरिकी अदालत के न्यायाधीशों ने चेतावनी दी कि इस तरह फैसले को सही ठहराने से राष्ट्रपतियों को प्रभावी रूप से टैरिफ लगाने की असीमित शक्ति मिल जाएगी. अदालत ने कहा कि 1974 में जब कांग्रेस ने यह कानून पारित किया था, तब इसके उद्देश्य कुछ और थे. इस कानून का इस्तेमाल व्यापार घाटे से निपटने के लिए नहीं किया जा सकता.

हालांकि मामले की सुनवाई कर रहे तीन जजों की पीठ में एक जज टिमोथी स्टैन्स्यू ने तर्क दिया कि अदालत को राष्ट्रपति के आर्थिक निर्णयों पर पुनर्विचार नहीं करना चाहिए. लेकिन बहुमत टैरिफ के खिलाफ रहा. अब इस फैसले के खिलाफ अमेरिकी संघीय सर्किट अपील न्यायालय में अपील की जा सकती है. अंततः यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में वापस जा सकता है.

बता दें कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड की पार्टी के कुछ नेता भी उनके टैरिफ से जुड़े फैसलों को लेकर विरोध जता चुके हैं. सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैककोनेल ने कहा था कि टैरिफ लगाने में कांग्रेस को दरकिनार करने के लिए आपातकालीन अधिकारों का उपयोग करना अवैध था. अमेरिका में कई कानून के जानकार ये भी मानते हैं कि टैरिफ और व्यापार नीति पर संवैधानिक अधिकार व्हाइट हाउस के पास नहीं बल्कि कांग्रेस के पास है.

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