ईरान जंग और होर्मुज स्ट्रेट ने बिगाड़ा अमेरिका का बजट! 3 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची महंगाई
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गोरिन्शास ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो ग्लोबल आर्थिक ग्रोथ रेट गिरकर करीब 2% तक आ सकती है, जिसे आम तौर पर ग्लोबल मंदी माना जाता है.
अमेरिका में फ्यूल ऑयल की कीमतों में सालाना आधार पर 58.9% का उछाल आया.
ईरान के साथ जंग और होर्मुज स्ट्रेट के लंबे समय से चोक प्वॉइंट बने रहने से अमेरिका को अब नुकसान झेलना पड़ रहा है. अमेरिका में महंगाई एक बार फिर चिंता का बड़ा कारण बन गई है. मई 2026 में अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति (Consumer Inflation) बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई. ये अप्रैल 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. पिछले साल से महंगाई पर काबू पाने की कोशिशों के बीच यह उछाल अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नीति निर्माताओं दोनों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आया है.
अमेरिका में इस बढ़ती महंगाई के पीछे सबसे बड़ी वजह ईरान से जंग, होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी और पेट्रोलियम प्रोडक्ट की कीमतों में जबरदस्त उछाल है. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में एनर्जी इंडेक्स सालाना आधार पर 23.5% बढ़ गया. अकेले मई महीने में ही एनर्जी प्रोडक्ट कीमतों में 3.9% का इजाफा हुआ है. खासतौर पर पेट्रोल की कीमतों ने आम अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर सबसे ज्यादा असर डाला. वहीं, गैसोलीन की कीमतें मई में एक महीने के भीतर 7% बढ़ीं, जबकि पिछले एक साल में इनमें 40.5% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई.
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कोर इंफ्लेशन पर फोकस
स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फ्यूल ऑयल की कीमतों में सालाना आधार पर 58.9% का उछाल आया. ये सभी प्रमुख कैटेगरी में सबसे ज्यादा है. हालांकि, महंगाई के आंकड़ों का दूसरा पहलू भी है. अमेरिकी केंद्रीय बैंक और अर्थशास्त्री जिस कोर इंफ्लेशन’ पर ज्यादा ध्यान देते हैं, वह अभी भी अपेक्षाकृत नियंत्रण में दिखाई दे रही है.
खाने-पीने और एनर्जी प्रोडक्ट के दाम तेजी से बढ़े
रिपोर्ट के मुताबिक, खाद्य और ऊर्जा जैसी अस्थिर कैटेगरी को छोड़कर कोर महंगाई दर 2.9% रही. इससे संकेत मिलता है कि ऊर्जा क्षेत्र को छोड़कर अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों में कीमतों का दबाव उतना ज्यादा नहीं है. इसके बावजूद कुछ अन्य क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय मूल्य वृद्धि देखने को मिली.
एयरलाइन किरायों में भारी उछाल
एयरलाइन किरायों में पिछले एक वर्ष के दौरान 26.7% की बढ़ोतरी हुई. वहीं अमेरिकी परिवारों के सबसे बड़े खर्चों में शामिल आवास (Shelter) की लागत 3.4% बढ़ी. खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी 3.1% की वृद्धि दर्ज की गई. इसका मतलब है कि ऊर्जा संकट का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है, बल्कि यात्रा, आवास और दैनिक जरूरतों पर भी दिखाई दे रहा है.
अमेरिका में अलग-अलग जगहों पर इंफ्लेशन रेट में फर्क
महंगाई का प्रभाव पूरे अमेरिका में समान नहीं है. विभिन्न क्षेत्रों में कीमतों की बढ़ोतरी अलग-अलग स्तर पर दर्ज की गई है. न्यूयॉर्क-न्यूजर्सी सिटी क्षेत्र में महंगाई दर 5.1% तक पहुंच गई, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है. दूसरी ओर डलास क्षेत्र में यह दर केवल 2.6% रही। यह अंतर स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों, आवास लागत और क्षेत्रीय ऊर्जा खपत के कारण देखा जा रहा है.
2024 और 2025 में कम थी महंगाई
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2024 और 2025 के दौरान अमेरिका में महंगाई लगातार नरम पड़ रही थी. उस अवधि में मुद्रास्फीति आमतौर पर 2.3% से 3% के बीच बनी रही थी. इससे यह उम्मीद जगी थी कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती कर सकता है, लेकिन 2026 की शुरुआत से ऊर्जा कीमतों में तेजी ने महंगाई को फिर ऊपर धकेल दिया है.
4.4% तक जाएगी ग्लोबल महंगाई
इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) ने बताया कि ईरान जंग से पहले उम्मीद थी कि इस साल ग्लोबल महंगाई 4.1% से घटकर 3.8% हो जाएगी, लेकिन अमेरिका की महंगाई को देखते हुए इसके 4.4% तक पहुंचने का अनुमान है.
अमेरिका ने ईरान जंग में फूंके 95 लाख करोड़ रुपये
हार्वर्ड की इकोनॉमिस्ट लिंडा बिल्म्स का अनुमान है कि अमेरिका ने इस युद्ध पर करीब 1 ट्रिलियन डॉलर यानी 95 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं. हालांकि, अमेरिकी सरकार ने 25 अरब डॉलर खर्च करने की बात कही है.
ट्रंप की रेटिंग भी गिरी
डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान जंग एक बड़ा दांव था. उन्होंने इसे जल्दी खत्म करने का वादा किया था, लेकिन ये जंग 4 महीने तक चली. अब 19 जून को पीस डील पर साइन होने की बात कही जा रही है. इसमें भी इजरायल रोड़ा बन रहा है. इस बीच CNN के पोल में सामने आया, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता भी घटकर 37% रह गई है.
नुकसान झेलकर भी ईरान ने दिखाई अपनी ताकत
इस जंग से ईरान की सत्ता को काफी नुकसान हुआ है. हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण दिखाकर ईरान ने दुनिया पर दबाव बनाने की अपनी ताकत भी दिखा दी है. वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को शुरुआत में ईरान जंग से रणनीतिक फायदा मिला, लेकिन अब वहां भी लोग मानते हैं कि जंग में जीत साफ नहीं है. पीस डील से इजरायल ही सबसे बड़ी लूज़र होगी.
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