
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Israel Iran War: पांच हफ्तों से ज्यादा समय से युद्ध की आग में झुलस रहा मिडिल ईस्ट अब राहत की सांस लेता दिखाई दे रहा है. एक नाटकीय लेकिन महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में, बुधवार (8 अप्रैल 2026) को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर पर सहमति बन गई है.
इस ऐतिहासिक विकास की घोषणा खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से की, जिसकी बाद में ईरान द्वारा भी आधिकारिक पुष्टि कर दी गई. यह समझौता न केवल युद्ध की विभीषिका को थामने वाला है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद निर्णायक साबित होने वाला है.
इस युद्धविराम समझौते का सबसे महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का निर्णय है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह रणनीतिक चोक पॉइंट है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है. युद्ध के कारण यह मार्ग पूरी तरह ठप पड़ा था, जिससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला चरमरा गई थी.
ईरान और ओमान को अब इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल या शुल्क लगाने की अनुमति देने की बात कही जा रही है. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के अनुसार, एक क्षेत्रीय अधिकारी ने पुष्टि की है कि ईरान इस टोल से होने वाली आय का उपयोग युद्ध में हुए विनाश के बाद पुनर्निर्माण के कार्यों में करेगा.
हालांकि ओमान द्वारा इस राशि के उपयोग को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के इतिहास में एक बड़ा बदलाव है. अब तक विश्व समुदाय इसे एक मुक्त अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग मानता था, जहां कभी शुल्क नहीं लिया गया, लेकिन अब इसके ओमान और ईरान के क्षेत्रीय जल में होने के तर्क को वित्तीय मान्यता मिल गई है.
टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, वर्तमान में ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹18.5 करोड़) प्रति जहाज टोल वसूल रहा है. हालांकि, किन देशों से यह शुल्क लिया गया है, इसकी जानकारी अभी गुप्त है.
विशेषज्ञों और ईरान-इराक जाइंट चैंबर के अनुसार, यदि ईरान को आधिकारिक तौर पर यह टोल वसूलने का अधिकार मिलता है, तो वह सालाना 70-80 अरब डॉलर (करीब ₹7.5 लाख करोड़) की विशाल कमाई कर सकता है, जिसका उपयोग वह युद्ध के बाद देश के पुनर्निर्माण के लिए करेगा.
होर्मुज स्ट्रेट पर टोल टैक्स के जरिए हर साल लगभग 100 अरब डॉलर की कमाई होने का अनुमान है. यह व्यवस्था ठीक वैसी ही होगी जैसे मिस्र स्वेज नहर से टोल वसूल कर अपनी अर्थव्यवस्था चलाता है. हालांकि, इस कुल राशि में ओमान की हिस्सेदारी कितनी होगी, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर करता है, यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से भारत में ऊर्जा संकट और महंगाई का खतरा मंडराने लगा था. अब भारतीय तेल और गैस टैंकर बिना किसी डर और देरी के इस मार्ग से आवाजाही कर सकेंगे, जिससे भारत के तेल भंडारों की आपूर्ति सुनिश्चित होगी.
युद्ध के दौरान भी भारत के विदेश और शिपिंग मंत्रालय ने ईरान के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा था और अपने कई जहाजों को सुरक्षित निकलवाया था. अब पूर्ण सीजफायर होने से बाकी बचे जहाजों और व्यापारिक मिशनों के लिए रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
गौरतलब है कि 28 फरवरी को जब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव युद्ध में बदला, तो उसका सीधा असर वैश्विक तेल-गैस की 20 से 25 प्रतिशत सप्लाई पर पड़ा था. दुनिया भर में तेल की कमी और बढ़ती कीमतों ने हाहाकार मचा दिया था. होर्मुज स्ट्रेट में कई हफ्तों तक फंसे रहे जहाज वैश्विक व्यापार के ठप होने का प्रतीक बन गए थे.
यह दो सप्ताह का युद्धविराम भले ही अस्थायी लगे, लेकिन इसने एक बड़े वैश्विक संकट को टाल दिया है. अगर यह शांति बनी रहती है और होर्मुज स्ट्रेट सुचारू रूप से कार्य करता है, तो यह न केवल पश्चिमी एशिया के देशों के लिए बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी का काम करेगा. दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह दो सप्ताह का सीजफायर एक स्थायी शांति समझौते में तब्दील हो पाएगा.
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