
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Israel Iran War: ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ा संघर्ष अब चरम पर पहुंच चुका है. हवाई हमलों में ईरान के परमाणु संयंत्रों, तेल फैक्ट्रियों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है. लेकिन इस भीषण गोलाबारी के बीच भी फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा सा द्वीप- खार्ग आइलैंड अब तक पूरी तरह सुरक्षित है.
यह महज एक द्वीप नहीं, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था की धड़कन है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस द्वीप पर एक भी मिसाइल गिरना तीसरे विश्व युद्ध का बिगुल फूंकने जैसा हो सकता है.
खार्ग आइलैंड ईरान के तट से महज 25 किलोमीटर दूर उत्तरी फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा सा कोरल द्वीप है. 1960 के दशक में अमेरिकी तेल कंपनी अमोको द्वारा विकसित यह केंद्र आज ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात टर्मिनल है.
ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी द्वीप से होकर गुजरता है. यहां रोजाना 70 लाख बैरल तेल लोड करने की क्षमता है. इसकी रणनीतिक स्थिति इसे तेल सुपरटैंकर्स के लिए सबसे सुलभ स्थान बनाती है. पूर्व अमेरिकी दूत रिचर्ड नेप्यू के शब्दों में, “इस द्वीप के बिना ईरान की अर्थव्यवस्था पाषाण युग में चली जाएगी.”
सवाल यह उठता है कि जब अमेरिका और इजरायल ईरान को कमजोर करना चाहते हैं, तो उन्होंने अब तक इस सबसे बड़े आर्थिक केंद्र को निशाना क्यों नहीं बनाया? इसका जवाब वैश्विक कूटनीति और तेल बाजार की स्थिरता में छिपा है.
खार्ग पर हमला होते ही दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें 150 से 200 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं. इससे पूरी दुनिया में महंगाई का ऐसा दौर आएगा जिसे संभालना नामुमकिन होगा.
चीन, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. खार्ग पर हमले का सीधा मतलब चीन की ऊर्जा आपूर्ति को चुनौती देना है, जो अमेरिका और चीन के बीच सीधे टकराव का कारण बन सकता है. हडसन इंस्टीट्यूट के माइकल डोरन के अनुसार, अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था की नींव को पूरी तरह नष्ट नहीं करना चाहता क्योंकि ऐसा करने पर ईरान करो या मरो की स्थिति में आकर पूरे क्षेत्र में तबाही मचा सकता है.
खार्ग आइलैंड की बनावट ऐसी है कि यह एक आसान लक्ष्य है, लेकिन साथ ही एक हनी ट्रैप भी. द्वीप के दक्षिणी हिस्से में तेल के विशाल स्टोरेज टैंक एक साथ सटे हुए हैं. समुद्र में लंबी जेटी निकली हुई हैं जहां टैंकर तेल भरते हैं. यदि यहां हमला होता है, तो ईरान के पास केवल एक रास्ता बचेगा, वो है होर्मुज जलडमरूमध्य. जिसे ईरान बंद करने का ऐलान कर चुका है. दुनिया का 20 प्रतिशत तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है.
कई सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि खार्ग आइलैंड पर हमला वह चिंगारी होगी जो पूरे मध्य पूर्व को बारूद के ढेर में बदल देगी. ईरान इसे अपने अस्तित्व पर हमला मानेगा. प्रतिक्रिया स्वरूप वह न केवल तेल टैंकरों पर हमले शुरू कर देगा, बल्कि उसके सहयोगी देश और संगठन पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली हितों को निशाना बनाएंगे. चीन और रूस जैसे देशों की संलिप्तता इस युद्ध को वैश्विक स्तर पर फैला सकती है.
फिलहाल, खार्ग आइलैंड पर गतिविधियां सामान्य हैं और तेल की लोडिंग जारी है. लेकिन यह खामोशी कितनी लंबी होगी, यह कहना मुश्किल है. अमेरिका और इजरायल के लिए यह द्वीप एक ऐसी लाल रेखा है जिसे पार करना मतलब पूरी दुनिया को युद्ध की आग में झोंकना है. खार्ग आइलैंड वाकई में एक ऐसा छोटा सा बिंदु है जिस पर पूरी दुनिया की शांति और अर्थव्यवस्था टिकी हुई है.
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