न्यूयॉर्क: अमेरिका में रह रहे एक पाकिस्तानी मूल के शख्स को वहां की अदालत ने अलकायदा से जुड़े आतंकी संगठन ‘जब्हात अल-नुसरा’ को सहायता, समर्थन और संसाधन पहुंचाने की कोशिश के आरोप साबित होने पर सात साल कारावास की सजा सुनाई है. उत्तरी कैरोलीना में रहने वाले 39 वर्षीय बासित जावेद शेख ने अपना जुर्म पहले ही कबूल कर लिया था.

पेरिस: प्रदर्शनकारियों को मैक्रों की चेतावनी कहा, मैं किसी भी सूरत में हिंसा स्वीकार नहीं करूंगा

फेसबुक पोस्ट में किया समर्थन
अमेरिका के उत्तरी कैरोलीना के रहने वाले बासित जावेद शेख (39) को निगरानी में रखे जाने के बाद 84 महीनों की सजा सुनाई गई है. शेख ने इसी साल अगस्त में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था. बासित का जन्म अमेरिका में नहीं हुआ है लिहाजा उसे अमेरिका से बाहर रखा जा सकता है. बासित बरसों से वैध स्थायी निवासी के तौर पर अमेरिका में रह रहा है. अभियोजन के हलफनामे में 2013 में बासित की कई फेसबुक पोस्ट का जिक्र किया गया है, जो उसके ‘जब्हात अल नुसरा’ के प्रति समर्थन को दर्शाते हैं.

H-1B Visa पर ट्रंप सरकार का नया प्रस्ताव: नैस्कॉम ने कहा, अमेरिका में नौकरियों पर आ सकता है संकट

जाना चाहता था सीरिया !
सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले बासित को यह पता था कि अमेरिका ‘जब्हात अल नुसरा’ को आतंकी संगठन के रूप में नामित कर चुका है. अमेरिका के उत्तरी कैरोलीना के अटॉर्नी कार्यालय ने कहा कि हलफनामे में दी गई जानकारी के मुताबिक शेख ने फेसबुक का इस्तेमाल इस्लामी चरमपंथ की हिंसक विचारधारा के प्रचार के लिए किया. बासित शेख पुलिस की गिरफ्त में तब आया जब उसने एक व्यक्ति को ‘जब्हात अल नुसरा’ का सदस्य समझ लिया और उसके पास जाकर उससे ‘मुजाहिदीन’ को किसी भी तरह की मदद देने के लिए सीरिया जाने की इच्छा जताई. (इनपुट एजेंसी)