वाशिंगटन: अमेरिकी संसद ने तिब्बत को लेकर एक सख्त कानून पारित किया है. संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुके इस क़ानून पर राष्ट्रपति ट्रम्प की मुहर लगनी बाकी है. इस कानून का स्वागत करते हुए अमेरका के एक शीर्ष सीनेटर ने बुधवार को कहा कि यह कानून दशकों से हो रहे अन्याय के समाधान की दिशा में मजबूत द्विदलीय कदम है.Also Read - China-Taiwan conflict: बन रहे युद्ध जैसे हालात, अब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कह दी ये बड़ी बात

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गौरतलब है अमेरिकी संसद के दोनों सदनों ने ‘रेसिप्रोकल एक्सेस टू तिब्बत एक्ट’ पारित कर दिया है. अब यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए गया है जिसके बाद इसे कानून का दर्जा मिल जाएगा. इसके तहत अमेरिकी नागरिकों, सरकारी अधिकारियों और पत्रकारों को तिब्बत तक जाने की अनुमति नहीं देने वाले चीनी अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध लगाने सहित अन्य कठोर कदम शामिल हैं.

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अमेरिकी सीनेटर पैट्रिक लीह ने सदन में कहा यह कानून दशकों से हो रहे अन्याय के समाधान की दिशा में मजबूत द्विदलीय कदम है. उन्होंने रेखांकित किया कि चीन की सरकार ने मनमाने तरीके से तिब्बत जाने के लिए विदेशी राजनयिकों, पत्रकारों और पर्यटकों को विशेष परमिट जारी करने की अनिवार्यता लगा रखी है और वह अकसर परमिट देने से इंकार भी कर देता है. जबकि शिन्जियांग सहित अन्य क्षेत्रों के लिए ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है. लीह ने कहा, और जब चीन परमिट जारी करता भी है, उस वक्त भी चीनी सरकार का एक गाइड हमेशा सभी के साथ मौजूद होता है. अब इस क़ानून के बन जाने से तिब्बत में एक्सेस को लेकर चीन के मनमाने रवैये में सुधार आने की गुंजाइश है. वहीं तिब्बत की संप्रभुता को लेकर मुहिम चलाने वाली संस्थाओं ने इसे उनके अभियान में एक सार्थक और महत्वपूर्ण कदम बताया है.

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