अमेरिका को अपने जिगरिया यार से खतरा! करवा रहा जासूसी, रिपोर्ट ने मचाई खलबली
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल अमेरिकी प्रशासन के भीतर ईरान युद्ध को लेकर चल रही चर्चाओं और रणनीतिक विचार-विमर्श की जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकता है.
अमेरिका और इजरायल की दोस्ती 78 साल पुरानी है. इस सदाबहार रिश्ते की शुरुआत 1948 में हुई थी. (AP)
अमेरिका और इजरायल को दुनिया के सबसे करीबी रणनीतिक साझेदारों में गिना जाता है. अब दोनों देशों के रिश्तों को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने वॉशिंगटन और तेल अवीव की बढ़ती दूरियों की ओर इशारा किया है. अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पेंटागन ने इजरायल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे के स्तर को बढ़ाकर सबसे ऊंची क्रिटिकल कैटेगरी में डाल दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) ने हाल के हफ्तों में यह आकलन जारी किया. अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इजरायल अमेरिकी प्रशासन के भीतर ईरान युद्ध को लेकर चल रही चर्चाओं और रणनीतिक विचार-विमर्श की जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकता है.
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आखिर क्यों बढ़ी चिंता?
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर मतभेद बढ़े हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच युद्ध की रणनीति और आगे की दिशा को लेकर अलग-अलग सोच सामने आई है. इसी को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की चिंता बढ़ गई हैं.
NBC News के हवाले से आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि DIA ने एक इंटर्नल मैसेज और 7 पन्नों के आकलन दस्तावेज के जरिए अधिकारियों को आगाह किया. इसमें इजरायल की खुफिया गतिविधियों और उसकी सूचना जुटाने की क्षमता को लेकर विशेष चिंता जताई गई.
अमेरिकी अधिकारी क्यों इस्तेमाल करते हैं 'बर्नर फोन'?
रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल यात्रा पर जाने वाले कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों को अतिरिक्त सुरक्षा सावधानियां बरतनी पड़ती हैं. इनमें अस्थायी या बर्नर फोन का इस्तेमाल, अस्थायी कंप्यूटर और संवेदनशील चर्चाओं के लिए विशेष संचार प्रोटोकॉल शामिल हैं.
पूर्व राजनयिकों और सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि कई अमेरिकी अधिकारी इजरायल में होटल कमरों या अन्य स्थानों पर गोपनीय विषयों पर चर्चा करने से भी बचते हैं, क्योंकि उन्हें निगरानी की आशंका रहती है.
इजरायल ने आरोपों को किया खारिज
हालांकि, इजरायल ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है. इजरायली दूतावास ने कहा कि इजरायल अमेरिकी सरकारी अधिकारियों या संस्थाओं के खिलाफ खुफिया जानकारी एकत्र नहीं करता.
वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने भी रिपोर्ट को गलत बताते हुए कहा कि इस तरह की कहानी ऐसे लोगों पर आधारित है, जिन्हें वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है.
क्या देश भी एक-दूसरे की जासूसी करते हैं?
खुफिया मामलों के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में मित्र देशों के बीच भी जासूसी असामान्य नहीं है. कई बार सहयोगी देश भी एक-दूसरे की नीतियों, रणनीतियों और बातचीत की जानकारी जुटाने की कोशिश करते हैं. लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि हालिया गतिविधियों को लेकर जो चिंताएं पैदा हुई हैं, वे सामान्य खुफिया गतिविधियों से आगे की लगती हैं.
इतिहास में भी अमेरिका और इजरायल के बीच जासूसी विवाद सामने आते रहे हैं. 1980 के दशक का जोनाथन पोलार्ड मामला और 2019 में व्हाइट हाउस के आसपास कथित निगरानी उपकरण मिलने की घटनाएं अक्सर इस संदर्भ में चर्चा में रहती हैं.हालांकि, इजरायल ने ऐसे आरोपों से हमेशा इनकार किया है.
क्या रिश्तों पर पड़ेगा असर?
फिलहाल अमेरिका और इजरायल दोनों सरकारों ने सार्वजनिक तौर पर अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत बताया है, लेकिन पेंटागन के भीतर खतरे का स्तर बढ़ाने की खबर यह संकेत देती है कि ईरान युद्ध और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों को लेकर दोनों सहयोगियों के बीच भरोसे की परीक्षा हो रही है.
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