नई दिल्‍ली/ न्‍यूयॉर्क: अमेरिका ने चीन के साथ टकराव में भारतीय सैनिकों की जाने जाने पर गहरी संवेदना जताई है. यूएस के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा, हम चीन के साथ हालिया टकराव के परिणामस्वरूप खोए हुए जीवन के लिए भारत के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं. हम सैनिकों के परिवारों, प्रियजनों और समुदायों को याद करेंगे, क्योंकि वे दुखी हैं. Also Read - भारत विरोधी टिप्‍प्‍णी का मामला: नेपाल में पीएम ओली के भविष्‍य पर आज होगा फैसला

वहीं, हांगकांग के मुद्दे पर माइक पोम्पिओ ने कहा- मेरे जी-7 समकक्षों और मैंने हांगकांग पर एक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करने के चीन के फैसले पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है. इस प्रस्ताव से उस व्यवस्था को खतरा होगा, जिसने हांगकांग को फलने-फूलने दिया है और कई वर्षों में इसे सफल बनाया है. हम सीसीपी से फिर से विचार करने का आग्रह करते हैं. Also Read - पीएम मोदी के बयान से 'विस्तारवादी' चीन को लगी मिर्ची, कहा- 'हमने 12 पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद सुलझाया'

अमेरिका का यह बयान तब आया है, जब‍ एक दिन पहले व्हाइट हाउस ने कहा था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पूर्वी लद्दाख में भारतीय एवं चीनी बलों के बीच हुई झड़प से अवगत हैं और दोनों देशों के बीच मध्यस्थता को लेकर अमेरिका की कोई औपचारिक योजना नहीं है. Also Read - विराट कोहली ने शुरू किया वर्कआउट; खोला अपनी फिटनेस का राज

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैली मेकनैनी ने सीमा पर हुई झड़प के बारे में पूछे जाने पर संवाददाताओं से कहा, ”राष्ट्रपति को इसकी जानकारी है. हम पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय एवं चीनी बलों के बीच हालात पर नजर रख रहे हैं.” उन्होंने कहा था, हमने भारतीय सेना का बयान देखा है कि झड़प में 20 भारतीय जवानों ने जान गंवाई है और हम इसे लेकर गहरी संवेदना प्रकट करते हैं.

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैली मेकनैनी ने कहा था कि भारत और चीन के बीच मध्यस्थता की कोई औपचारिक योजना नहीं है. मेकनैनी ने कहा, ”मैं केवल यह बताना चाहती हूं कि इस साल दो जून को (अमेरिका के) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई बातचीत में दोनों ने भारत-चीन सीमा पर स्थिति को लेकर बातचीत की थी.”

भारत ने कहा है कि गलवान घाटी में सोमवार रात चीनी सैनिकों के साथ झड़प में कम से कम 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे. चीनी विदेश मंत्रालय के अधिकारी चीन के जवानों के हताहत होने के बारे में चुप्पी साधे हुए हैं. हालांकि चीन के अधिकारिक मीडिया ने चीनी सैनिकों के हताहत होने की बात भी स्वीकार की है, लेकिन कितने सैनिक मारे गए या घायल हुए, यह उल्लेख नहीं किया है.

बता दें कि गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी सहित पूर्वी लद्दाख के कुछ अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दोनों देशों के सैनिक पिछले पांच सप्ताह से आमने-सामने तैनात हैं. बीते सोमवार को हुआ संघर्ष नाथू ला में 1967 में हुई उस झड़प के बाद सबसे बड़ा संघर्ष है, जिसमें चीन के 300 से अधिक सैनिक मारे गए थे और भारत के लगभग 80 जवान शहीद हो गए थे.

भारत और चीन का सीमा विवाद 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर है. चीन, तिब्बत के दक्षिणी हिस्से के रूप में अरुणाचल प्रदेश पर दावा करता है, जबकि भारत इसे अपना अभिन्न अंग बताता है.