वॉशिंगटन: अफगानिस्तान और तालिबान के साथ शान्तिपूर्ण बातचीत कर सुलह करने के अमेरिकी प्रयास को तेजी देने के लिए अमेरिका के विशेष दूत जल्मी खलीलजाद (Zalmay Khalilzad) ने चार  अक्टूबर से अपना अफगान-पाक क्षेत्र का पहला दौरा शुरु किया. वह पश्चिम एशिया के प्रमुख देशों के दौरे पर भी जाएंगे.

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बुधवार को अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि खलीलजाद चार से चौदह अक्टूबर के बीच अफगानिस्तान, पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और सऊदी अरब के दौरे में एक अंतरएजेंसी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे.

तालिबान से शान्ति वार्ता का होगा प्रयास
विदेश मंत्रालय की प्रेस रिलीज के मुताबिक, ‘खलीलजाद का मिशन तालिबान को वार्ता की मेज पर लाने के लिए समन्वय स्थापित करना और अमेरिकी प्रयासों की अगुवाई करना है. ऐसा वह अफगान सरकार और अन्य पक्षकारों से साथ करीबी समन्वय रखते हुए करेंगे.’

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को प्रेस रिलीज जारी कर दौरे के उद्देश्य किए स्पष्ट

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को प्रेस रिलीज जारी कर दौरे के उद्देश्य किए स्पष्ट

2003 से 2005 तक अफगानिस्तान में राजदूत रह चुके हैं खलीलजाद
‘विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने के बाद यह उनका पहला दौरा होगा. यह दौरा अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया को संभव बनाने में मदद देने, इसे सुगम बनाने और इसमें शामिल होने के प्रशासन के इरादे को दर्शाता है.’ खलीलजाद 1980 से अमेरिका और अफगानिस्तान के विदेशी मामलों में खास भूमिका निभाते रहे हैं. 2003 से 2005 तक अफगानिस्तान में राजदूत के रूप में काम कर चुके खलीलजाद ने अफगानी संविधान को तैयार करने में भी सहयोग किया था. अब तालिबान इस संविधान को उखाड़ फेंकना चाहता है.

खलीलजाद से आशंकित हुआ पाकिस्तान
वहीं पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरेशी ने बुधवार को खलीलजाद की भूमिका पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि, ‘खलीलजाद की नियुक्ति को लेकर पाकिस्तानी मीडिया बहुत नकारात्मक है क्योंकि खलीलजाद ने पहले कई पाकिस्तान विरोधी वक्तव्य दिए है.’ उन्होंने आगे कहा कि अब खलीलजाद आम नागरिक नहीं हैं, इसलिए उम्मीद है कि अफगानिस्तान में सुलह प्रयासों के दौरान वो पाकिस्तानियों की भावनाओं का भी ख्याल रखेंगे.

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में राजदूत रहने के दौरान खलीलजाद ने अमेरिका से पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की अपील की थी.