ईरान को 'सबक' सिखाने के चक्कर में कंगाल हुआ अमेरिका, दुनिया को ताबड़तोड़ बेचा तेल, अब खुद के लिए खरीदने की आ गई नौबत

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:June 16, 2026 6:57 PM IST

अमेरिकी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में 12 जून 2026 तक करीब 34.03 करोड़ बैरल तेल बचा है. यह 1983 के बाद का सबसे निचला लेवल बताया जा रहा है

मिडिल ईस्ट में 107 दिनों की तबाही के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने जा रहा है. 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देश MoU पर साइन करेंगे. ईरान को न्यूक्लियर पावर बनने रोकने और उसके एनरिच्ड यूरेनियम को सीज करने के लिए अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर 28 फरवरी 2026 को जंग छेड़ी थी. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करके दुनिया के सामने एक फ्यूल क्राइसिस जैसी स्थिति खड़ी कर दी. ऐसे समय में अमेरिका ने दूसरे देशों को टैंकर भर-भरकर तेल बेचे. इससे मुनाफा भी खूब कमाया. लेकिन, ईरान को सबक सिखाने के चक्कर में अमेरिका कंगाल हो गया है. अमेरिका का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तेजी से घट रहा है.

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CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी ने ऑयल रिजर्व के आंकड़े शेयर किए हैं. अमेर‍िका का इमरजेंसी ऑयल र‍िजर्व 43 साल के सबसे न‍िचले लेवल पर पहुंच गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 12 जून 2026 को US का स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व घटकर 34.03 करोड़ बैरल रह गया. अमेरिकी अधिकारियों ने पिछले एक हफ्ते के अंदर ही इस रिजर्व से 89 लाख बैरल क्रूड ऑयल बाजार में भेजा है. ये अमेरिकी इतिहास में खतरनाक संकेत है.

ईरान जंग के बाद अमेरिका ने निकाला कितना तेल?

तेल का खजाना खाली होने की सबसे बड़ी वजह यह है कि ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ा. तेल की कीमतें न बढ़ें, इसलिए मार्च 2026 में ट्रंप सरकार ने पेट्रोलियम रिजर्व से 17 करोड़ तेल रिलीज करने का वादा किया था. इसके बाद ट्रंप सरकार ने दूसरे देशों को ताबड़तोड़ तेल बेचे. रिपोर्ट कहती है कि फरवरी के आख‍िर में ईरान के साथ शुरू हुई जंग के बाद से इस रिजर्व से 7.5 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है, जो कि इसकी क्षमता में 18 फीसदी की भारी गिरावट है.

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बाइडेन के कार्यकाल से भी घटा स्टॉक

रिपोर्ट के मुताबिक, ऑयल र‍िजर्व का मौजूदा लेवल जुलाई 2023 के उस स्तर से भी नीचे चला गया, जो राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान रूस-यूक्रेन जंग के समय दर्ज किया गया था. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने SPR से रिकॉर्ड मात्रा में तेल जारी किया था. इसके बाद जुलाई 2023 में ऑयल रिजर्व करीब 347 मिलियन बैरल तक गिर गया था, जो उस समय लगभग 40 साल का मिनिमम लेवल था. लेकिन, अब जून 2026 में यह और नीचे आकर 340.3 मिलियन बैरल पर पहुंच गया है.

जुलाई 1983 के बाद सबसे निचले लेवल पर पहुंचा स्टॉक

मौजूदा समय में तेल का यह स्टॉक जुलाई 1983 के बाद का सबसे छोटा वॉल्‍यूम है. रोचक यह है क‍ि साल 1983 में रोनाल्‍ड रीगन प्रशासन पहली बार इस स्‍ट्रैटज‍िक र‍िजर्व को तैयार कर रहा था. हालांकि, उस समय अमेरिकी इकोनॉमी का साइज आज के मुकाबले काफी छोटा था.

कैसे खाली होता गया अमेरिका का तेल?

1975 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड ने एनर्जी पॉलिसी एंड कंजर्वेशन एक्ट पर साइन किए थे. इसके तहत SPR (स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व) बनाए गए. अमेरिका के पास 4 बड़े SPR हैं. इनकी कैपासिटी 71.35 करोड़ बैरल तेल की है. यानी इनमें 71 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल रखा जा सकता है. ईरान के साथ जंग शुरू होने से पहले तक अमेरिका के SPR में 41.54 करोड़ बैरल तेल था. यानी, जंग शुरू होने के बाद अमेरिका का तेल का खजाना लगभग 7.5 करोड़ बैरल यानी 18% तेल खत्म हो चुका है.

ईरान के मुकाबले अमेरिका के पास कितना तेल?

ईरान और अमेरिका के बीच तेल भंडार की तुलना करें, तो ईरान काफी आगे दिखाई देता है, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के पास करीब 208 अरब बैरल कच्चे तेल का भंडार है, जबकि अमेरिका के पास लगभग 74 अरब बैरल तेल भंडार मौजूद है. यानी तेल भंडार के मामले में ईरान अमेरिका से लगभग तीन गुना आगे है.

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पेट्रोलियम प्रोडक्ट में अमेरिका आगे

हालांकि, सिर्फ भंडार ज्यादा होने का मतलब यह नहीं कि कोई देश सबसे बड़ा तेल उत्पादक भी हो. उत्पादन के मामले में अमेरिका दुनिया का नंबर-1 देश है. अमेरिका रोजाना करीब 13 से 14 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन करता है, जबकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और निवेश संबंधी चुनौतियों के कारण ईरान का उत्पादन लगभग 3 से 4 मिलियन बैरल प्रतिदिन के आसपास रहता है. यही वजह है कि तेल भंडार में ईरान की स्थिति मजबूत होने के बावजूद वैश्विक तेल बाजार पर अमेरिका का प्रभाव अधिक दिखाई देता है.

अमेरिका को अब अपने लिए तेल खरीदने की आ सकती है नौबत

अमेरिकन पेट्रोलियम रिजर्व के CEO माइक सोमर्स ने पिछले हफ्ते चेतावनी दी थी कि SPR में कम से कम 20% तेल होना जरूरी है. उन्होंने कहा था कि खतरे की घंटी बजने लगी है. हम ऐसे स्तर पर पहुंच रहे हैं, जहां अब चिंता होने लगी है. अभी अमेरिका के पेट्रोलियम रिजर्व में 48% से भी कम तेल बचा है. यानी अब अमेरिका को खुद अपने इस्तेमाल के लिए तेल खरीदना पड़ सकता है.

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