
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
US Airstrike Syria: वेनेजुएला में सफल सैन्य ऑपरेशन के बाद अब अमेरिका ने सीरिया में बमबारी की है. पिछले महीने पाल्मायरा में इस्लामिक स्टेट (ISIS) द्वारा किए गए घातक हमले का जवाब देने के लिए अमेरिका ने एक व्यापक सैन्य अभियान ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक शुरू किया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों पर की गई यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ा सैन्य प्रहार है.
इस सैन्य अभियान की शुरुआत पिछले महीने हुए उस दुखद हमले के बाद हुई, जिसमें अमेरिका ने अपने दो सैनिकों, सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस-टोवर और सार्जेंट विलियम नथानिएल हॉवर्ड को खो दिया था. उनके साथ एक अमेरिकी सिविलियन इंटरप्रेटर, अयाद मंसूर सकत की भी जान चली गई थी. ये दोनों सैनिक आयोवा नेशनल गार्ड के सदस्य थे. इस बलिदान ने वॉशिंगटन को एक कठोर जवाबी रणनीति बनाने पर मजबूर कर दिया.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, शनिवार को किए गए हमले इस बड़े ऑपरेशन का हिस्सा थे. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य पूरे सीरिया में फैले ISIS के नेटवर्क को ध्वस्त करना है. अमेरिकी वायु सेना और पार्टनर फोर्सेज ने मिलकर आतंकियों के लॉजिस्टिक्स हब, ट्रेनिंग कैंप और हथियारों के जखीरों को निशाना बनाया है.
इससे पहले 19 दिसंबर को भी मध्य सीरिया में एक बड़ा हमला किया गया था, जिसमें आतंकियों के 70 से अधिक ठिकानों को तबाह कर दिया गया था. सेंट्रल कमांड ने एक बेहद कड़ा संदेश जारी करते हुए कहा है, “हमारा संदेश स्पष्ट है यदि आप हमारे सैनिकों को नुकसान पहुंचाएंगे, तो हम आपको ढूंढ निकालेंगे और दुनिया के किसी भी कोने में खत्म कर देंगे.”
इस ऑपरेशन की सबसे महत्वपूर्ण बात सीरिया में बदलता राजनीतिक समीकरण है. सालों तक कुर्द नेतृत्व वाली सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज अमेरिका की मुख्य साझीदार रही है, लेकिन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद की सत्ता के पतन के बाद स्थितियां बदली हैं. वॉशिंगटन अब सीरिया की नई अंतरिम सरकार के साथ समन्वय बढ़ा रहा है.
सीरिया अब आधिकारिक तौर पर ISIS के खिलाफ वैश्विक गठबंधन में शामिल हो गया है. यह तालमेल न केवल इस्लामिक स्टेट की कमर तोड़ने के लिए जरूरी है, बल्कि मध्य पूर्व में एक नई स्थिरता लाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
ISIS ने हाल के महीनों में अपनी उपस्थिति फिर से दर्ज कराने की कोशिश की है. ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक के जरिए अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यह आतंकी संगठन दोबारा सिर न उठा सके.
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन की यह आक्रामक नीति आतंकियों के सुरक्षित पनाहगाहों को पूरी तरह खत्म करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकती है. आतंकवाद के खिलाफ इस युद्ध में अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने सैनिकों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देगा.
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