वॉशिंगटन: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कुछ देशों पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंध को जायज ठहराया और उन दावों को खारिज कर दिया कि यह मुस्लिमों के साथ भेदभाव करने वाला है. यात्रा प्रतिबंध के दायरे में आने वाले अधिकतर मुस्लिम देश हैं. कोर्ट द्वारा चार जजों के मुकाबले पांच जजों के बहुमत वाला यह फैसला ट्रंप प्रशासन की किसी नीति पर पहला ठोस फैसला है. मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने बहुमत का फैसला लिखा जिसमें चार अन्य न्यायाधीशों की सहमति भी शामिल थी.Also Read - मोदी का कांग्रेस पर वार, बोले- मुस्लिम देशों से मिल रहे समर्थन के कारण कांग्रेस और उसके सहयोगी परेशान

कोर्ट ने फैसले में क्या कहा
रॉबर्ट्स ने लिखा कि राष्ट्रपति के पास आव्रजन के नियमन की पर्याप्त शक्ति है. उन्होंने इस कानून को चुनौती देने वालों की यह दलील खारिज कर दी कि इसकी भावना मुस्लिम विरोधी है. उन्होंने हालांकि सावधानीपूर्वक सामान्य रूप से आव्रजन और खास तौर पर मुसलमानों को लेकर ट्रंप के भड़काउ बयानों का समर्थन नहीं किया. रॉबर्ट्स ने लिखा कि हम नीति की गंभीरता को लेकर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे. Also Read - चीन में बंदी 10 लाख मुस्लिम उइगरों पर बोला अमेरिका, 'मुस्लिम देशों की चुप्पी हैरान करने वाली'

फैसले को पलटने की मांग
वहीं एक शीर्ष भारतीय-अमेरिकी एटार्नी ने मांग की है कि कांग्रेस को मुस्लिम बहुल कई देशों के लोगों के खिलाफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अत्याचारी यात्रा प्रतिबंध को पलट देना चाहिए. ट्रंप के विवादास्पद यात्रा प्रतिबंध के खिलाफ प्रमुख वादियों में से एक नील कत्याल ने कहा कि नीति असंवैधानिक, अभूतपूर्व , अनावश्यक और गैर – अमेरिकी है. ओबामा प्रशासन में डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रह चुके कत्याल ने कांग्रेस से कार्रवाई की मांग की. ट्रम्प ने जनवरी 2017 में कार्यभार संभालने के एक हफ्ते बाद ही पहले यात्रा प्रतिबंध की घोषणा की थी. इससे ईरान , उत्तर कोरिया , सीरिया , लीबिया , यमन , सोमालिया और वेनेजुएला के लोगों के प्रवेश पर रोक लग गयी थी. Also Read - यौन उत्पीड़न का आरोप झेल रहे ब्रेट कावानाह अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जज बने

विरोध शुरू
भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने कहा कि यह फैसला सभी अमेरिकी लोगों के मौलिक अधिकारों पर सवाल खड़े करता है. यह एक मानक तय करता है कि राष्ट्रपति नतीजों की परवाह किए बिना किसी को भी निशाना बना सकते हैं और किसी के भी खिलाफ भेदभाव कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि मुस्लिम प्रतिबंध से मुस्लिम परिवारों एवं समुदायों को पहले ही अपूरणीय क्षति पहुंची है. कई परिवार अब भी अपने प्रियजनों से अलग रह रहे हैं.

परेशान करने वाला फैसला
साउथ एशियन अमेरिकन्स लीडिंग टूगेदर (साल्ट) ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के लिए आधुनिक समय में सबसे ज्यादा परेशान करने वाला है. यह एक ऐसा फैसला है जो खुले तौर पर कानून के समक्ष गैरबराबरी को संहिताबद्ध करता है. सिख अमेरिकन लीगल डिफेंस एंड एजुकेशन फंड ने कहा कि यह देश विविधता पर बना है और हम हमेशा दुनियाभर के प्रवासियों का सम्मिश्रण रहे हैं. हमें हमारे बच्चों का उज्जवल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए विविधता और समावेशिता के उच्च मानकों को बरकरार रखना चाहिए.