समंदर में चीन को दबोचने की तैयारी! भारत के तीन दोस्त मिलकर बना रहे ये घातक अंडर वाटर वेपन

Written By: Vineet Sharan Updated by: Vineet Sharan
Published Date:May 31, 2026 1:40 PM IST

Underwater Drone Technology: अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि वे मिलकर पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन की टेक्नोलॉजी विकसित करेंगे.

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Underwater Drone Technology: ईरान युद्ध में दुनिया ने हवा में उड़ते ड्रोनों का कहर देखा है. विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन भी ऐसा ही कहर बरपा सकते हैं. अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने इस चुनौती के सामने कमर कस ली है.

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि वे अपने सैन्य गठबंधन 'ऑकस' (Aukus) के तहत काम करेंगे. वे समुद्र के नीचे बिछी केबलों की सुरक्षा मजबूत करेंगे. साथ ही, पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन की टेक्नोलॉजी विकसित करेंगे.

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अगले साल तक की टाइमलाइन

उम्मीद है कि बिना चालक वाले पानी के नीचे चलने वाले वाहन (UUV) की यह टेक्नोलॉजी अगले साल तक तैयार हो जाएगी.

बड़ी बातें

  • इस प्रोजेक्ट की कुल लागत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई
  • ब्रिटेन के रक्षा मंत्री ने कहा कि उनका देश £150 मिलियन पाउंड का योगदान देगा
  • UUV टेक्नोलॉजी, 'ऑकस' के 'पिलर टू' के तहत आने वाला पहला प्रमुख प्रोजेक्ट है
  • इस रक्षा समझौते के 'पिलर वन' (Pillar One) के तहत परमाणु-शक्ति से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियाँ बनाई जाएंगी

सिंगापुर में सुरक्षा शिखर सम्मेलन

सिंगापुर में आयोजित एक सुरक्षा शिखर सम्मेलन में इन देशों के रक्षा मंत्रियों की ओर से की गई यह घोषणा, 'ऑकस' के प्रोजेक्ट्स में धीमी प्रगति होने के आरोपों के बाद सामने आई है. हीली ने कहा, ऑकस में हमने बहुत लंबे समय तक सिर्फ बातें ही कीं, लेकिन काम बहुत कम किया. अब हमारी तीनों सरकारों के नेतृत्व में यह स्थिति बदल गई है.

क्या है ऑकस

ऑकस' रक्षा समझौते की शुरुआत 2021 में हुई थी. यह समझौता इस बात की पुष्टि करता है कि ये तीनों देश यानी अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया मिलकर परमाणु पनडुब्बियां विकसित करेंगे और एक-दूसरे के साथ अपनी सैन्य विशेषज्ञता साझा करेंगे.

इस समझौते को व्यापक रूप से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी और दक्षिण चीन सागर जैसे विवादित क्षेत्रों में बढ़ते तनाव में उसकी भूमिका का मुकाबला करने के एक तरीके के तौर पर देखा जाता है. हालांकि शनिवार को, तीनों रक्षा मंत्रियों ने इस बारे में सीधी टिप्पणी नहीं कि क्या UUV टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट का मकसद रूस और चीन की पानी के नीचे की गतिविधियों का मुकाबला करना है.

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