
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की US First Policy और बिजनेसवादी सोच की वजह से कई देशों में उथल-पुथल मची हुई है. इस राजनीतिक अनिश्चिता की ताजा आग वेनेजुएला और कोलंबिया में देखी जा रही है. 3 जनवरी को अमेरिकी सेना ने इस दक्षिण अमेरिकी देश में एयर स्ट्राइक की थी. ट्रंप के आदेश पर US आर्मी ने न सिर्फ वेनेजुएला पर हमला किया, बल्कि वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके बेडरूम से खींचकर अपने साथ लेकर गए.फिलहाल मादुरो अपनी पत्नी के साथ न्यूयॉर्क के डिटेंशन सेंटर में कैद हैं. इस राजनीतिक अस्थिरता का असर वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है.
आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में जहां 10 ग्राम सोना 1 लाख 35 हजार का आंकड़ा पार कर चुका है और जल्द संभव है कि ये डेढ़ लाख के पार चला जाए. दूसरी ओर, वेनेजुएला में 1 ग्राम सोना सिर्फ 181 रुपये में मिल रहा है. आपको पढ़ने और सुनने में शायद ये अटपटा लगे, लेकिन यही वेनेजुएला की हकीकत है.
सस्ते में सोना मिलने की वजह?
इंटनरेशनल बुलियन मार्केट के मुताबिक, भारत में 24 कैरेट के 1 ग्राम सोने की कीमत करीब 13,827 रुपये है. जबकि, वेनेजुएला में 24 कैरेट सोने का दाम इंडियन करेंसी में महज 181.65 रुपये है. वेनेजुएला में 22 कैरेट सोने का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जो वहां 166 रुपये प्रति ग्राम के आसपास मिल रहा है. वेनेजुएला में इतना सस्ता सोना अच्छी इकोनॉमी का संकेत नहीं, बल्कि अमेरिका के एक्श के बाद वहां की करेंसी ‘वेनेजुएलन बोलिवर’ (VES) के ऐतिहासिक गिरावट का प्रतीक है.
स्विट्जरलैंड भेजा गया सोना
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के कार्यकाल के दौरान 2013 से 2016 के बीच करीब 113 मीट्रिक टन सोना गुपचुप तरीके से स्विट्जरलैंड भेजा गया था. उस समय सरकार ने अर्थव्यवस्था को सहारा देने और कर्ज चुकाने के लिए अपने गोल्ड रिजर्व का इस्तेमाल किया था. नतीजा यह हुआ कि कभी सोने से लदे रहने वाले इस देश का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व साल-दर-साल घटता चला गया.
वेनेजुएला के पास 8000 टन सोने का भंडार
वेनेजुएला दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से है, जहां कुदरत ने दोनों हाथों से खजाना लुटाया है. दुनिया के कच्चे तेल का 17% भंडार इसी देश के पास है. वेनेजुएला की धरती के नीचे ‘ओरिनोको माइनिंग आर्क’ में 8,000 टन से ज्यादा सोना, हीरे और बॉक्साइट का विशाल भंडार दबा हुआ है.इसके बाद भी हालात ऐसे हैं कि वेनेजुएला के लोग खाने के लिए दाने-दाने को तरस रहे हैं.
एक दशक में गंवा दी 80% GDP
वहीं, वेनेजुएला के पास कभी सऊदी अरब से भी ज्यादा तेल हुआ करता था, लेकिन पिछले एक दशक में उसने अपनी 80% GDP गंवा दी है. मादुरो की तानाशाही और सिस्टम में बढ़ते करप्शन को इसकी वजह माना जा रहा है. 1990 के दशक के आखिर में जो देश रोजाना 35 लाख बैरल तेल निकालकर दुनिया पर राज करता था, वह आज 2026 की शुरुआत तक बमुश्किल 8 से 11 लाख बैरल पर सिमट गया है.
US ऑपरेशन के बाद हालात बदलेंगे या और बिगड़ेंगे?
ट्रंप सरकार का दावा है कि वेनेजुएला में हुए आर्मी ऑपरेशन के बाद अब अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला में अरबों डॉलर का निवेश करेंगी. वहां के टूटे हुए इंफ्रास्ट्रक्चर की मेंटेनेंस का काम होगा. धीरे-धीरे इकोनॉमी और राजनीति को पटरी पर लाया जाएगा. हालांकि, वहां बदलाव आएगा या नहीं… ये कहना अभी जल्दबादी होगी. क्योंकि, वहां की नई सरकार और ट्रंप का अगला कदम ही वेनेजुएला की दशा और दिशा तय करेगा.
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