Vladimir Putin Warns Donald Trump Says Us Tariffs Against India Will Fail
'भारत के खिलाफ कोई...', ट्रंप के टैरिफ पर पुतिन का वार- जानें क्या-क्या कहा?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका के उन प्रयासों की आलोचना की, जिसमें भारत और चीन को रूस के साथ ऊर्जा संबंध घटाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की जा रही थी. उन्होंने अमेरिका के इस फैसले की निंदा की.
Vladimir Putin on Donald Trump: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार (2 अक्टूबर) को अमेरिका के उन प्रयासों की आलोचना की, जिनमें भारत और चीन पर मास्को के साथ अपने ऊर्जा संबंध घटाने के लिए दबाव डाला जा रहा था. पुतिन ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम आर्थिक रूप से उल्टा असर डाल सकते हैं. पुतिन ने कहा कि अगर रूस के व्यापारिक साझेदारों पर उच्च टैरिफ लगाए जाते हैं, तो इससे वैश्विक कीमतें बढ़ेंगी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें ऊंची बनाए रखने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. इसके परिणामस्वरूप अमेरिका की अर्थव्यवस्था धीमी हो जाएगी. उन्होंने ये भी कहा कि भारत और चीन ‘अपने आप को अपमानित होने की अनुमति नहीं देंगे.’
पुतिन संभावित रूप से 5-6 दिसंबर को भारत का दौरा करेंगे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे. दोनों देश वैश्विक अनिश्चितताओं और बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिद्वंद्विता के बीच रणनीतिक साझेदारी को व्यापक बनाने का प्रयास कर रहे हैं. ये दौरा उस समय हो रहा है जब ट्रंप प्रशासन की तरफ से टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. रूस, अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित भारतीय निर्यातकों को बाजार तक पहुंच प्रदान करने के प्रयास में लगा हुआ है.
मोदी सरकार ने क्या कहा?
मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता की नीति अपनाता है और इसके फैसले राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होते हैं, जबकि भारत के परंपरागत संबंध विदेशी नीति का आधार हैं. भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी यूरेशिया में स्थिरता बनाए रखने वाला एक महत्वपूर्ण तत्व बनी हुई है. ये रूस-यूक्रेन युद्ध के फरवरी 2022 में शुरू होने के बाद पुतिन का भारत का पहला दौरा होगा. पुतिन ने आखिरी बार दिसंबर 2021 में भारत का दौरा किया था, जब वे सीधे एयरपोर्ट से हैदराबाद हाउस शिखर सम्मेलन के लिए गए थे.
मोदी और पुतिन 23वां शिखर सम्मेलन करेंगे, जिसमें रक्षा, पारंपरिक ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा, कृषि और व्यापार सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. एजेंडे में रूस का SU57 फाइटर जेट्स की आपूर्ति का प्रस्ताव शामिल है, जिसमें 70% तकनीक हस्तांतरण और बाद में संयुक्त उत्पादन की योजना है. इसके अलावा, भारत की अतिरिक्त S400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की मांग और S500 प्रणाली के संयुक्त उत्पादन का प्रस्ताव भी शामिल है. एजेंडे में नौसेना के लिए मिसाइल सिस्टम और उपकरण भी शामिल होंगे.
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