Iran War: जमीन पर उतरी अमेरिका की सेना तो किन खतरों से जूझना पड़ेगा? ईरान के पास क्या हैं विकल्प, जानिए सबकुछ
अमेरिकी सैनिक अगर जमीन पर उतरते हैं तो उनका मिशन आसान नहीं होने वाला. ईरान की धरती पर अमेरिकी फौज को किन खतरों और मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है, यहां जानिए विस्तार से.
America vs Iran: ईरान के साथ जारी युद्ध में अमेरिका जमीन पर सैनिक उतारने की योजना बना रहा है. माना जा रहा है कि इस अभियान को अमेरिकी मरीन अंजाम देंगे. ये साफ नहीं है कि अमेरिकी सैनिकों का लक्ष्य क्या है लेकिन, रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान का खार्ग द्वीप अमेरिका के निशाने पर है. इस योजना की भनक ईरान को भी है. यही कारण है कि ईरान ने अभी से जाल बिछाना शुरू कर दिया है. अमेरिकी सैनिक अगर जमीन पर उतरते हैं तो उनका मिशन आसान नहीं होने वाला. ईरान की धरती पर अमेरिकी फौज को किन खतरों और मुसीबतों का सामना करना पड़ सकता है, यहां जानिए विस्तार से.
ईरान के डिफेंस लेयर का सामना
अमेरिकी बेड़े को खार्ग द्वीप तक पहुंचने के लिए होर्मुज के संकरे रास्ते से ही होकर गुजरना होगा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान की जमीनी सीमा से ज्यादा दूर नहीं है. अपने तटीय इलाके में ईरान ने अतिरिक्त सैन्य कर्मियों तथा हवाई सुरक्षा प्रणालियों को पहले ही तैनात करना शुरू कर दिया है. यहां अमेरिकी मरीन के शिप आर्टिलरी की सीधी रेंज में भी होंगे. इसलिए यूएस आर्मी के लिए जोखिम बेहद ज्यादा है.
ईरान की हथियार बंद स्पीड बोट्स का खतरा
अमेरिका ने ईरान की नेवी को बर्बाद करने का दावा किया है. लेकिन, अभी तक ईरानी नौसेना की बड़े युद्धपोत ही तबाह हुए हैं. समंदर में ईरान की असली ताकत छोटी स्पीड बोट्स हैं जो हथियारों से लैस हैं. ईरान के पास छोटी नावों का एक भंडार है जो स्वचलित हैं. इनमें विस्फोटक भरकर बड़े युद्धपोतों से टकराया जा सकता है. होर्मुज के संकरे रास्ते से गुजरते समय अमेरिकी मरीन के लिए ये एक बड़ा खतरा है.
ईरान की सेना
इस युद्ध में ईरान की सेना ने अभी तक कोई बड़ी भूमिका नहीं निभाई है. मिसाइल और ड्रोन हमलों की कमान IRGC के पास है और यही युद्ध में सीधे शामिल है. अमेरिकी सैनिक जमीन पर उतरते हैं तो उन्हें ईरान की बड़ी सेना से टकराना पड़ेगा जिसकी संख्या 5 लाख से ज्यादा है. ईरान ने अमेरिका को अपनी इसी ताकत के दम पर जमीन पर उतरने की चुनौती भी दी है.
कंधे से दागे जाने वाले रॉकेट और मिसाइलों का खतरा
भले ही अमेरिका राष्ट्रपति ईरान की जमीन पर सैनिक उतारने की योजना बना रहे हों लेकिन, अमेरिका के ही सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे किसी भी ऑपरेशन में जोखिम बहुत ज्यादा होगा. अगर अमेरिका सैनिक खार्ग द्वीप तक पहुंच भी जाते हैं तो उनके लिए इस पर कब्जा जमाना आसान नहीं होगा. ईरान ने खार्ग पर कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें और रॉकेट सिस्टम से लैस अतिरिक्त सैनिक तैनात किए हैं. इनसे निपटना भी अमेरिका के लिए मुश्किल चुनौती है.
सीमित है अमेरिकी सैनिकों की संख्या
अमेरिका के सामने एक बड़ी चुनौती सैनिकों की संख्या को लेकर भी है. अमेरिकी नेवी के एम्फीबियस शिप पर लगभग 2200 मरीन तैनात होते हैं. लेकिन, इनमें से लड़ाकू दस्ता केवल 800 सैनिकों का ही होता है. दूसरी तरफ ईरान की लाखों की फौज है. किसी अप्रिय हालात में अमेरिका के लिए बैक-अप सैनिक भेजना भी मुश्किल होगा. CNN की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी सेना खार्ग द्वीप और ईरान के तटीय इलाकों पर लगातार हवाई निगरानी रख रही है और यहां किए गए सुरक्षा उपायों का पता भी लगा रही है. हालांकि, इन सबके बाद भी ईरान की जमीन पर उतरकर ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम देना अमेरिकी सेना के सामने एक ऐसी चुनौती है जिसका सामान इतिहास में पहले कभी नहीं किया गया है.
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