
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
How cluster bomb missiles work: ईरान और इजरायल अमेरिका का युद्ध हर बीतते दिन के साथ घातक होता जा रहा है. हाल में ही इजरायली अधिकारियों का दावा किया कि ईरान ने ऐसी बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं जिनमें क्लस्टर वॉरहेड लगे थे. क्लस्टर बम की भयावहता को ध्यान में रखकर100 से अधिक देशों ने इसे बैन किया है. जब ये बम हवा में फटते हैं, तो मौत की बारिश करते हैं. आइए जानते हैं क्लस्टर बम के बारे में विस्तार से….
क्लस्टर बम कोई एक बम नहीं, बल्कि बमों का एक बड़ा डिब्बा या कंटेनर होता है. इसे हवा से गिराया जा सकता है या मिसाइल के जरिए दागा जा सकता है. हवा में एक निश्चित ऊंचाई पर पहुंचते ही इसका मुख्य हिस्सा खुल जाता है और भीतर से दर्जनों छोटे बम बाहर निकलते हैं. मुख्य कंटेनर के हवा में खुलते ही छोटे विस्फोटकों (Submunitions) को एक बड़े इलाके में फैला देता है. ये छोटे बम पैराशूट या ग्रैविटी के जरिए जमीन पर गिरते हैं. इनका लक्ष्य एक ही समय में कई ठिकानों जैसे टैंकों, सैनिकों या हवाई पट्टियों को तबाह करना होता है. क्लस्टर बम की सबसे बड़ी खासियत इसका कवरेज एरिया है. एक अकेला क्लस्टर बम कई फुटबॉल मैदानों के बराबर इलाके को पूरी तरह तबाह कर सकता है. जब सैकड़ों छोटे बम एक साथ फटते हैं, तो उस इलाके में किसी का भी बचना नामुमकिन हो जाता है.
अमेरिका के B61 जैसे ग्रेविटी बम और क्लस्टर बम में बड़ा अंतर है. ग्रेविटी बम आमतौर पर एक सटीक निशाने (Point Target) पर गिरकर बड़ा धमाका करते हैं. वहीं क्लस्टर बम कार्पेट बॉम्बिंग की तरह पूरे इलाके को मलबे में तब्दील कर देते हैं, जिससे नागरिक हताहत होने का खतरा ज्यादा रहता है.
रिपोर्ट्स की मानें तो, एक बेसिक क्लस्टर शेल की कीमत लगभग 500 से 3000 डॉलर यानि तकरीबन 42,000 से 2.5 लाख रुपये के बीच होती है. हालांकि, आधुनिक और स्मार्ट क्लस्टर हथियार जैसे SMArt-155 की कीमत 80,000 डॉलर, लगभग 67 लाख रुपये, तक जा सकती है. मिसाइल पर लगने वाले वॉरहेड की कीमत इससे भी कहीं अधिक होती है.
क्लस्टर बम की सबसे बड़ी बुराई इसका फेलियर रेट है. अक्सर 2% से 40% छोटे बम गिरने के बाद तुरंत नहीं फटते. ये जमीन पर पड़े रहते हैं और युद्ध खत्म होने के वर्षों बाद भी लैंडमाइन की तरह काम करते हैं, जिससे मासूम बच्चों और नागरिकों की जान जाती रहती है.
इनकी भयावहता को देखते हुए 2008 में कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन संधि हुई, जिस पर 111 देशों ने हस्ताक्षर किए. यह संधि इनके इस्तेमाल और उत्पादन पर रोक लगाती है. हालांकि, ईरान, इजरायल, रूस, अमेरिका और भारत जैसे कई देशों ने अब तक इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं.
खबरों के अनुसार, ईरान ने इजरायल पर क्लस्टर वॉरहेड वाली बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं. यदि यह सच है, तो यह युद्ध के नियमों का बड़ा उल्लंघन माना जा सकता है. इजरायल का आयरन डोम और एरो सिस्टम इन मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन क्लस्टर बमों को रोकना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है.
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