वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि वह चीन पर व्यापार प्रतिबंधों को अंतिम रूप दे रहे हैं. हालांकि, इस बीच अमेरिका का एक प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को सुलझाने के लिए बीजिंग यात्रा की तैयारी में है. व्हाइट हाउस ने कहा कि चीन पर मार्च में जो प्रतिबंध लगाने की घोषणा की गई थी, वे मुख्य रूप से चीन द्वारा अमेरिकी बौद्धिक संपदा की चोरी से संबंधित हैं. इन पर अभी काम चल रहा है और आगामी महीने में इसके ब्योरे की घोषणा होगी.

दो सप्‍ताह में बदल गया अमेरिका का रुख
व्हाइट हाउस के रुख में दो सप्ताह के भीतर यह बदलाव देखा गया है. इससे पहले दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम करने पर सहमति बनी थी. दस दिन पहले ही अमेरिका के वित्त मंत्री स्टीवन नूचिन ने कहा था कि चीन के माल पर शुल्क लगाने की पहल ‘‘स्थगित’’ रखी गई है.

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चीन ने बताया सहमति का उल्‍लंघन
वहीं चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि व्हाइट हाउस का यह कदम कुछ दिन पहले दोनों देशों के बीच बनी सहमति का उल्लंघन है. मंत्रालय ने कहा, ‘‘अमेरिका जो भी कदम उठाएगा, चीन के पास अपने देश के लोगों और देशहित को सुरक्षित रखने के लिए पूरा विश्वास, क्षमता और अनुभव मौजूद है.’’

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अमेरिका पर भी पड़ सकता है असर
इस बीच, खबर के अनुसार उद्योग के नेताओं तथा सांसदों ने चेताया है कि ट्रंप प्रशासन द्वारा चीन के 50 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों पर 25 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाने से अमेरिकी उपभोक्ता बुरी तरह प्रभावित होंगे. व्हाइट हाउस ने मंगलवार को कहा था कि अमेरिका चीन के 50 अरब डॉलर के उत्पादों पर 25 प्रतिशत का शुल्क लगाएगा. यूएस चैंबर आफ कॉमर्स के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी थॉमस जे डोनोह्यू ने कहा, ‘‘यूएस चैंबर प्रशासन के चीन के अनुचित व्यापार व्यवहार से निपटने के कदम का समर्थन करता है. हालांकि, हमारा मानना है कि इस तरह के शुल्क से अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा.’’

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सांसद और संयुक्त आर्थिक समिति के चेयरमेन इरिक पॉलसन ने कहा कि चीन को अमेरिकी बौद्धिक संपदा के संरक्षण में अपनी विफलता को स्वीकार करना चाहिए. हालांकि इस तरह का शुल्क प्रभावी जवाब नहीं है क्योंकि इससे अमेरिकी नौकरियां और उपभोक्ता प्रभावित होंगे.