'फर्जी है पूरा दावा...', अमेरिका ने ईरान की 'सीक्रेट डील' रिपोर्ट को बताया झूठ, आग-बबूला हुए ट्रंप

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:May 27, 2026 10:57 PM IST

ईरानी मीडिया में अमेरिका-ईरान समझौते की खबर सामने आने के बाद व्हाइट हाउस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. अमेरिका ने साफ कहा कि कथित MoU पूरी तरह फर्जी है और ऐसी किसी डील पर सहमति नहीं बनी है.

Donald Trump on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर सामने आई खबरों पर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. ईरानी सरकारी मीडिया की तरफ से कथित तौर पर एक प्रारंभिक MoU का मसौदा जारी किए जाने के बाद व्हाइट हाउस ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है. अमेरिका ने साफ शब्दों में कहा है कि ऐसी किसी डील का अस्तित्व नहीं है और ईरानी मीडिया की रिपोर्ट 'पूरी तरह मनगढ़ंत' है.

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व्हाइट हाउस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान नियंत्रित मीडिया की रिपोर्ट सच नहीं है. बयान में कहा गया, 'जो MoU जारी करने का दावा किया गया है, वह पूरी तरह फर्जी है. किसी को भी ईरानी सरकारी मीडिया की बातों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। तथ्य मायने रखते हैं.'

क्या था ईरानी मीडिया का दावा?

दरअसल, ईरानी सरकारी टीवी ने दावा किया था कि तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संघर्ष कम करने को लेकर एक प्रारंभिक समझौते का मसौदा तैयार हुआ है. रिपोर्ट के अनुसार, इस संभावित डील में अमेरिका ईरान पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और खाड़ी क्षेत्र से अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने पर विचार कर सकता है. बदले में ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सामान्य करने को तैयार होगा.

ईरानी रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के संचालन को लेकर ओमान समेत क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर एक नई व्यवस्था बनाई जा सकती है. हालांकि, इसमें सैन्य जहाजों को शामिल नहीं किए जाने की बात कही गई थी. लेकिन अमेरिका ने इन सभी दावों को सीधे तौर पर नकार दिया है. व्हाइट हाउस का कहना है कि दोनों देशों के बीच इस तरह का कोई अंतिम या लगभग तय समझौता नहीं हुआ है. अमेरिकी प्रशासन ने ये भी संकेत दिया कि इस तरह की खबरें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रम फैलाने की कोशिश हो सकती हैं.

होर्मुज पर पड़ रहा जंग का असर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिना जाता है. वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने या किसी समझौते की खबर का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल कीमतों पर पड़ता है. पिछले कुछ महीनों से पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है. कई देशों को आशंका थी कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है.

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