
Gaurav Barar
गौरव बरार (Gaurav Barar) एक अनुभवी पत्रकार और कंटेंट विशेषज्ञ हैं जिनके पास 10 साल से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में, इंडिया.कॉम में बतौर चीफ सब एडिटर अपनी सेवाएं ... और पढ़ें
Israel Iran War: दक्षिणी ईरान के होर्मोज़्गान प्रांत के मीनाब शहर में 28 फरवरी 2026 को शजरेह तैयबा गर्ल्स एलीमेंट्री स्कूल पर हुए भीषण हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया. इस हमले में 165 से 180 लोगों की जान गई, जिनमें से ज्यादातर 7 से 12 साल की मासूम छात्राएं थीं.
अक्सर जब दो देशों के बीच जंग होती है तो स्कूल, अस्पताल जैसी जगहों को निशाना नहीं बनाया जाता है. लेकिन मिडिल ईस्ट में जारी इस जंग में ईरान के स्कूल पर हमला किया गया. ऐसे में अब सवाल ये उठ रहा है कि इस तबाही का जिम्मेदार कौन है? क्या यह इजरायल की कार्रवाई थी, या जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, यह ईरान की अपनी गलती थी? हालिया फैक्ट-चेक और जांच रिपोर्टों ने इस रहस्य से पर्दा हटाना शुरू कर दिया है.
यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था. शजरेह तैयबा स्कूल, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) नेवी बेस के करीब स्थित था. जांच से पता चला है कि यह एक डबल-टैप हमला था. इसका मतलब है कि पहले एक धमाका हुआ और जब छात्राएं और स्कूल स्टाफ अपनी जान बचाने के लिए प्रार्थना कक्ष की ओर भागे, तभी वहां दूसरी मिसाइल गिरा.
अल जजीरा के विश्लेषण के अनुसार, यह स्कूल पिछले 10 वर्षों से एक नागरिक संस्थान के रूप में स्पष्ट रूप से पहचाना जाता रहा है. ऐसे में इस पर हमला होना या तो खुफिया जानकारी की एक गंभीर विफलता है या फिर एक सोची-समझी क्रूर रणनीति.
नीदरलैंड्स के खोजी समूह बेलिंगकैट, न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट की जांच ने इस हमले के तार सीधे तौर पर अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से जोड़े हैं. ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी द्वारा जारी फुटेज के विश्लेषण से पता चला है कि हमला BGM-109 टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइल से किया गया था.
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस युद्ध में शामिल देशों में केवल अमेरिका के पास ही इस तरह के लंबी दूरी के सटीक हथियार मौजूद हैं. इजरायल के पास टॉमहॉक मिसाइलें होने की कोई जानकारी नहीं है. बेलिंगकैट के शोधकर्ता ट्रेवर बॉल ने उपग्रह चित्रों और जियोलोकेशन के आधार पर पुष्टि की कि मिसाइल ने सीधे तौर पर परिसर को निशाना बनाया.
हमले के तुरंत बाद दावों और खंडनों का दौर शुरू हो गया. एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को ही दोषी ठहरा दिया. उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि यह ईरान ने किया है क्योंकि उनके हथियार बहुत पुराने और सटीक नहीं हैं.”
अमेरिकी सेना ने इस घटना की जांच शुरू कर दी है. पेंटागन के नियमों के अनुसार, असेसमेंट तभी शुरू किया जाता है जब शुरुआती संकेतों से यह पता चले कि अमेरिकी सेना द्वारा नागरिकों को नुकसान पहुंचा हो सकता है. एक अनाम अधिकारी ने भी पुष्टि की कि यह हमला संभवतः अमेरिका द्वारा ही किया गया था.
अटलांटिक काउंसिल की वरिष्ठ वकील एलीस बेकर के अनुसार, स्कूलों को निशाना बनाना सशस्त्र संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है. यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने इसे मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन और एक संभावित युद्ध अपराध करार दिया है.
पेंटागन की प्रेस ब्रीफिंग में अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा, “हम इस मामले की जांच कर रहे हैं. हम कभी भी नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाते, लेकिन हम सच्चाई का पता लगाएंगे.” वहीं, ईरानी सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और एक जघन्य अपराध बताया है.
साक्ष्यों की कड़ियां अब एक ही दिशा में इशारा कर रही हैं. तकनीकी विश्लेषण और पेंटागन की अपनी आंतरिक जांच यह संकेत दे रही है कि मासूम बच्चियों की मौत की वजह वह अमेरिकी मिसाइल थी जो संभवतः अपने लक्ष्य से भटक गई या जिसे गलत खुफिया जानकारी के आधार पर दागा गया. यह घटना युद्ध के बीच निर्दोषों की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है.
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