ईरान जंग के बीच NYT में आखिर ऐसा क्या छपा, जिसे पाकिस्तान से छिपाना चाहते हैं आर्मी चीफ मुनीर?

Written By: Anjali Karmakar Updated by: Anjali Karmakar
Updated Date:April 24, 2026 11:20 PM IST

रिपोर्ट हटाए जाने की जानकारी खुद NYT के पाकिस्तान-अफगानिस्तान ब्यूरो चीफ एलियन पेल्टियर ने दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि यह स्टोरी इंटरनेशनल लेवल पर पब्लिश हुई, लेकिन पाकिस्तान के प्रिंट एडिशन में इसे जगह नहीं मिली.

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) की एक रिपोर्ट को लेकर पाकिस्तान में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. यह विवाद सिर्फ एक खबर तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मीडिया सेंसरशिप, अल्पसंख्यकों की स्थिति और सत्ता की संवेदनशीलता जैसे कई गंभीर सवाल सामने आए हैं. इस आर्टिकल को लेकर इतना विवाद है कि खुद पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर को दखल देना पड़ा. उन्होंने इस आर्टिकल को पाकिस्तान के अखबारों में छापने से रोक दिया.

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क्या है मामला?

दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) ने हाल ही में पाकिस्तान में शिया मुस्लिम समुदाय के बढ़ते गुस्से पर एक डिटेल रिपोर्ट पब्लिश की थी. यह रिपोर्ट दुनिया भर के इंटरनेशनल एडिशन में प्रमुखता से छपी. जब पाकिस्तान में बिकने वाले प्रिंट एडिशन की बात आई, तो यह खबर वहां से हटा दी गई.

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ब्यूरो चीफ ने दी खबर हटाने की जानकारी

रिपोर्ट हटाए जाने की जानकारी खुद NYT के पाकिस्तान-अफगानिस्तान ब्यूरो चीफ एलियन पेल्टियर ने दी. उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि यह स्टोरी इंटरनेशनल लेवल पर पब्लिश हुई, लेकिन पाकिस्तान के प्रिंट एडिशन में इसे जगह नहीं मिली. इसके पीछे कारण बताया गया कि यह रिपोर्ट सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील है. इसमें शिया-सुन्नी तनाव का जिक्र किया गया था.

पाकिस्तान के ही फ्रीलांस जर्नलिस्ट ने लिखी थी ये रिपोर्ट

गौर करने वाली बात ये है कि इस रिपोर्ट को पाकिस्तान के ही फ्रीलांस पत्रकार जिया उर रहमान ने लिखा था. इसमें बताया गया कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर (Asim Munir) ने हाल ही में शिया धर्मगुरुओं के साथ बैठक की थी. इस बैठक का मकसद शिया समुदाय के बढ़ते असंतोष को शांत करना था, ताकि देश के अंदर किसी बड़े सांप्रदायिक टकराव को रोका जा सके.

पाकिस्तान का अंदरूनी तनाव हुआ उजागर

रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान इस समय एक जटिल स्थिति में है. एक ओर वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर देश के अंदर ही शिया समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आंतरिक स्थिति अस्थिर है, तो पाकिस्तान बाहरी स्तर पर शांति की बात कैसे कर सकता है.

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पाकिस्तान में 3.5 करोड़ शिया मुसलमान

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट मुताबिक, पाकिस्तान में लगभग 3.5 करोड़ शिया मुसलमान रहते हैं. हाल के घटनाक्रम, खासकर ईरान से जुड़े घटनाओं के बाद इस समुदाय में गुस्सा और असुरक्षा की भावना बढ़ी है. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी देखने को मिले हैं, जिससे सरकार की चिंता और बढ़ गई है.

मीडिया सेंसरशिप छिड़ी बहस

इस पूरे मामले ने मीडिया सेंसरशिप पर भी बहस छेड़ दी है. आलोचकों का कहना है कि अगर किसी अंतरराष्ट्रीय अखबार की रिपोर्ट को देश के अंदर प्रकाशित होने से रोका जाता है, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है. वहीं, सरकार के समर्थकों का तर्क है कि संवेदनशील मुद्दों पर खबरों को नियंत्रित करना देश की स्थिरता के लिए जरूरी हो सकता है. NYT की यह रिपोर्ट सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति, धार्मिक संतुलन और मीडिया स्वतंत्रता की जटिल तस्वीर को उजागर करती है.

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