World War-2 में जान गंवाने वाले वायुसेना कर्मी का 82 साल बाद क्यों हुआ अंतिम संस्कार? जानें क्या है पूरा मामला

अमेरिका के वायुसेना कर्मी एयरमैन रॉबर्ट सायर जूनियर का विमान 22 जनवरी 1944 को हादसे का शिकार हो गया था. उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ आखिरी विदाई दी गई.

Published date india.com Published: May 5, 2026 8:33 PM IST
WW-2
एयरमैन रॉबर्ट सायर जूनियर की मौत 22 जनवरी 1944 को विमान हादसे में हुई थी. (Photo: IANS)

वर्ल्ड वॉर-2 के दौरान एक विमान हादसे में जान गंवाने वाले अमेरिकी वायुसेना कर्मी का अंतिम संस्कार 82 साल बाद किया गया. विश्व युद्ध के दौरान यह अमेरिकी वायुसेना कर्मी लापता हो गया था और उसके अवशेष की पहचान करीब 82 साल बाद DNA टेस्ट के जरिए हुई. न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में उनके परिवार ने उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी. 2 मई को उन्हें ईसाई रीति रिवाज से दफनाया गया. अमेरिकी सेना की आधिकारिक डिफेंस वेबसाइट के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना के एयरमैन रॉबर्ट सायर जूनियर का अंतिम संस्कार क्लियरवॉटर में किया गया. उनकी कहानी 22 जनवरी 1944 से शुरू होती है जब वे और उनके आठ साथी एक सीप्लेन में सवार थे, जो टेकऑफ के दौरान दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में स्थित वानुआतु के सेगोंड चैनल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था.

लंबे समय से चल रही थी तलाश

हादसे में तीन लोग बच गए और चार के शव तुरंत बरामद कर लिए गए. हालांकि, सायर (जो उस समय सिर्फ 19 वर्ष के थे) और एक अन्य साथी लंबे समय तक लापता रहे. जुलाई 2022 में सीलार्क एक्सप्लोरेशन के शोधकर्ताओं और गोताखोरों ने इस मलबे का पता लगाया. यह मिशन डिफेंस पीओडब्ल्यू/एमआईए अकाउंटिंग एजेंसी (DPAA) के अनुरोध पर किया गया था. DAPP युद्ध में लापता अमेरिकी सैनिकों की पहचान करने का काम करती है. बाद में कॉसमॉस आर्कियोलॉजी ने 2024 और 2025 में साइट की खुदाई की, जिसमें संभावित मानव अवशेष और हड्डियों के नमूने मिले. इन अवशेषों की पहचान माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए और मानवविज्ञान विश्लेषण के जरिए की गई, जिससे पुष्टि हुई कि ये रॉबर्ट सायर जूनियर के ही हैं.

मां-पिता भी अब दुनिया में नहीं

अमेरिकी ध्वज में लिपटा ताबूत, बंदूक सलामी और ‘टैप्स’ की धुन के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी गई. परिवार के सदस्यों ने कहा कि दशकों बाद उनकी तलाश खत्म हुई. हालांकि उनके अंतिम संस्कार में मां, पिता और बहन मौजूद नहीं थे, क्योंकि ये तीनों ही अब इस दुनिया में नहीं हैं. उनकी भांजी चिकी गोल्ड ने बताया कि सायर की मां को हमेशा विश्वास था कि उनका बेटा कहीं न कहीं जीवित या मौजूद है. वहीं उनके बेटे डॉन टीग ने कहा कि यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि इतने वर्षों बाद भी खोज प्रयास जारी रहते हैं.

कम उम्र में ही मिल चुके थे कई सम्मान

सायर को उनके सैन्य योगदान के लिए पर्पल हार्ट, कॉम्बैट एक्शन रिबन और वर्ल्ड वॉर II विक्ट्री मेडल जैसे सम्मान मिले थे. उनका नाम नेशनल मेमोरियल सेमेट्री ऑफ द पैसिफिक में ‘मिसिंग’ सूची में दर्ज था, जहां अब उनके नाम के साथ एक रोसेट (लंबे फीतों से बना बिल्ला) जोड़ा जाएगा, यह दर्शाने के लिए कि उनकी पहचान हो चुकी है. फिलाडेल्फिया में जन्मे और हार्टफोर्ड में पले-बढ़े सायर ने 17 साल की उम्र में नौसेना ज्वाइन की थी. उन्होंने दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र में 1,12,000 मील से अधिक की गश्ती उड़ानें भरी थीं और सोलोमन द्वीपों की लड़ाई को आसमान से देखा था.

(इनपुट:IANS) 

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें World Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.