
Gargi Santosh
गार्गी संतोष, जी मीडिया के India.com में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह हाइपरलोकल, नेशनल और वर्ल्ड सेक्शन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. गार्गी को लाइफस्टाइल, हेल्थ, टेक्नोलॉजी, और ... और पढ़ें
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस वक्त संघर्ष और युद्ध हो रहा है. ऐसी स्थिति में भारत भी इससे अछूता नहीं हैं. आइए खबर के माध्यम से जानते हैं किन-किन देशों में युद्ध चल रहे हैं और कौन संघर्ष के मुहाने पर खड़े हैं? रूस और यूक्रेन युद्ध 2022 से लगातार जारी है, जिसकी शुरुआत 2014 में क्रीमिया के रूस द्वारा कब्जे से हुई थी. रूस ने NATO के विस्तार को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा बताया और यूक्रेन पर हमला कर दिया. वहीं इजरायल-हमास संघर्ष ने 2023 में अचानक भड़कते हुए गाजा और इजरायल में भारी तबाही मचाई. हमास ने इजरायल पर हमला किया और बंधक बनाए, जिसके जवाब में इजरायल ने एयर और जमीनी स्ट्राइक शुरू की. गाजा में लाखों लोग प्रभावित हुए और ज्यादातर इमारतें नष्ट हुईं.
अफ्रीका में कांगो और रवांडा के बीच पुराने जातीय संघर्ष ने 2025 में फिर उग्र रूप लिया. M23 विद्रोही समूह ने कांगो के कई क्षेत्रों पर कब्जा किया, जिससे लाखों लोग विस्थापित हुए. सूडान में राष्ट्रीय सेना और अर्धसैनिक बल के बीच सत्ता संघर्ष ने देश को मानवीय संकट में डाल दिया. यहां अब तक करीब डेढ़ करोड़ लोग विस्थापित हुए हैं. सऊदी अरब और यमन में भी गृहयुद्ध लगातार जारी है, जहां हूती विद्रोही सऊदी समर्थित सरकार से लड़ रहे हैं. इन सभी संघर्षों का असर सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है.
3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वेनेजुएला पर मिलिट्री स्ट्राइक की और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया. इसे ऑपरेशन एब्सल्यूट रिजॉल्व कहा गया और इसका उद्देश्य नारको-टेररिज्म बताया गया. इसके बाद अमेरिका ने कोलंबिया और ग्रीनलैंड को भी अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों से जोड़ा. यह दिखाता है कि अमेरिका अब रणनीतिक रूप से अपनी सैन्य शक्ति को दुनिया भर में विस्तार दे रहा है. थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद, ईरान में विरोध प्रदर्शन और अमेरिका-ईरान तनाव भी वैश्विक राजनीति को अस्थिर बना रहे हैं.
चीन और ताइवान की स्थिति भी दुनिया के लिए चिंता का विषय है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और पिछले सालों में उसने वहां चारों तरफ मिलिट्री एक्सरसाइज की हैं. भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर और आतंकी ठिकानों पर हमला दिखाता है कि दक्षिण एशिया में भी कभी भी तनाव बढ़ सकता है. इन संघर्षों का असर सीधे भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और नागरिकों की आवाजाही पर पड़ता है. जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध ने तेल की कीमतें बढ़ा दी और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को प्रभावित किया.
इन युद्धों ने नई तकनीक और रणनीतियों को जन्म दिया. ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और सटीक हमले की क्षमता बढ़ी. भारत ने भी एयर डिफेंस के लिए सुदर्शन चक्र मिशन पर काम शुरू किया. इसी बीच, युद्धों ने डिफेंस इंडस्ट्री को तेजी से बढ़ने का मौका दिया. भारत ने 2025 में करोड़ों रुपए की इमरजेंसी और अपग्रेडेशन खरीद को मंजूरी दी. इन निवेशों से सेना की तैयारी मजबूत हुई और देश आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. कुल मिलाकर, युद्ध केवल मानवीय संकट नहीं, बल्कि तकनीकी, आर्थिक और रणनीतिक बदलाव की वजह भी बनते हैं.
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